नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) अमेरिका में मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगने के बावजूद भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। पार्टी ने कई सीटों पर जीत दर्ज की और पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी सेंध लगाई।
सूत्रों ने कहा कि भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते को अमेरिकी कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी की जरूरत नहीं है।
दोनों देशों ने इस साल फरवरी में समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप दिया था। हालांकि, अमेरिका की शुल्क व्यवस्था में बदलाव के कारण इस समझौते पर आगे बातचीत करनी पड़ी है।
अमेरिका ने 24 जुलाई से भारत समेत कई देशों से आयात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है। यह शुल्क अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 के तहत जबरन श्रम से जुड़े मुद्दों की जांच के बाद लगाया गया है। यह शुल्क पहले से लागू सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) दरों के अतिरिक्त है।
भारत औद्योगिक क्षमता के अधिक होने से जुड़ी चिंताओं को लेकर धारा 301 के तहत अमेरिका की दूसरी जांच के संबंध में भी उसके साथ बातचीत कर रहा है।
सूत्रों ने कहा कि अमेरिका को अपने व्यापारिक भागीदारों के लिए शुल्क व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले दूसरी जांच पूरी करनी होगी।
मध्यावधि चुनाव के नतीजों पर आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि इन नतीजों से डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति की दिशा में बदलाव नहीं आएगा। इसकी वजह यह है कि डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों दल अब आर्थिक राष्ट्रवाद, घरेलू विनिर्माण और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं का समर्थन करते हैं।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ''डेमोक्रेटिक सांसद भी स्थानीय श्रमिक संगठनों के सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए संरक्षणवादी शुल्क का समर्थन करते हैं। इसलिए अमेरिका की समग्र व्यापार नीति पहले जैसी ही बनी रहेगी।''
हाल के महीनों में दोनों पक्षों ने कहा है कि व्यापार समझौता लगभग तैयार है।
भाषा योगेश अजय
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