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भारत के कृषि क्षेत्र में 116 गीगावाट सौर मॉड्यूल की अतिरिक्त मांग की संभावना: आईएसएमए

नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) भारत के कृषि क्षेत्र में सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की सरकारी पहल से सौर मॉड्यूल की 116 गीगावाट की अतिरिक्त मांग पैदा हो सकती है। इससे घरेलू सौर उपकरण विनिर्माताओं के लिए बड़ा कारोबारी अवसर उपलब्ध होगा। भारतीय सौर विनिर्माता संघ (आईएसएमए) की रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।

‘पावरिंग द फार्म्स, बिल्डिंग द फैक्टरी’ (पीएम-कुसुम: सोलराइजिंग एग्रीकल्चर एंड स्ट्रेंथनिंग डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग) शीर्षक वाली इस रिपोर्ट के अनुसार, ग्रिड से जुड़े सिंचाई पंपों से 100 गीगावाट और डीजल से चलने वाले पंपों से 16 गीगावाट की अतिरिक्त सौर मॉड्यूल मांग पैदा हो सकती है। हालांकि, भूजल संकट वाले क्षेत्रों में स्थित डीजल पंपों को इस अनुमान में शामिल नहीं किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर में करीब 2.3 करोड़ सिंचाई पंप हैं। ऐसे में कृषि क्षेत्र को पूरी तरह सौर ऊर्जा से जुड़ने के बाद देश के सौर विनिर्माण उद्योग के लिए दीर्घकालिक मांग का बड़ा स्रोत बन सकता है। इससे स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार और घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के प्रयासों को भी गति मिलेगी।

भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन में दो नवंबर को जारी इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) को इस अवसर का प्रमुख आधार बताया गया है। इसके जरिए घरेलू स्तर पर निर्मित सौर मॉड्यूल और सेल के लिए निरंतर बाजार तैयार हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम-कुसुम के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 7.6 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी गई। जुलाई, 2026 तक 28 लाख से अधिक सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा (सौरकरण) जा चुका है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में बिजली की खपत भी सिंचाई पंपों और फीडरों के सौरकरण को तेज करने का आर्थिक आधार उपलब्ध कराती है। देश की कुल बिजली खपत में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 17.88 प्रतिशत है।

बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा दी जाने वाली बिजली सब्सिडी भी वित्त वर्ष 2019-20 के 1.21 लाख करोड़ रुपये से दोगुनी होकर वित्त वर्ष 2024-25 में 2.41 लाख करोड़ रुपये हो गई।

आईएसएमए के महासचिव अमित मनोहर ने कहा, ‘‘पीएम-कुसुम भारत के कृषि विकास और घरेलू सौर विनिर्माण की महत्वाकांक्षाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरी है। कृषि क्षेत्र से सौर मॉड्यूल की अनुमानित 116 गीगावाट अतिरिक्त मांग भारतीय विनिर्माताओं के लिए बड़ा अवसर है।’’

भाषा यासिर योगेश

योगेश