नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 1974 के एक संविधान पीठ फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि राज्यों के पास मौजूदा बिक्री कर के प्रतिशत के आधार पर अतिरिक्त बिक्री कर या अधिभार लगाने की शक्ति है।
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा शुल्क बिक्री कर की दर में वृद्धि माना जाएगा, न कि कारोबारी की आय पर अलग से लगाया गया कर।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सात-सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि करीब 27 साल पहले उसके समक्ष भेजे गए कानूनी सवाल पर अब अलग से फैसला करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस संबंध में कानूनी स्थिति 1974 में ही स्पष्ट की जा चुकी है। इसके अलावा, संबंधित कानूनों में बदलाव हो चुका है और अब माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था लागू है।
प्रधान न्यायाधीश ने 47 पन्नों के फैसले में कहा, ‘‘एस कोडार बनाम केरल राज्य मामले में 1974 की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया था कि देय बिक्री कर के प्रतिशत के आधार पर गणना किया गया अतिरिक्त कर या अधिभार बिक्री कर की दर में वृद्धि है और संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 54 के तहत वस्तुओं की बिक्री या खरीद पर लगाया जाने वाला कर है। यह फैसला अब भी प्रभावी है।’’
फैसले में कहा गया कि जिन संवैधानिक प्रावधानों और राज्य कानूनों के तहत विवादित अतिरिक्त कर लगाए गए थे, उनकी जगह अब नए प्रावधान आ चुके हैं या उनमें बदलाव किया जा चुका है। ऐसे में अदालत के समक्ष भेजे गए इस सवाल का भविष्य में कोई व्यावहारिक महत्व नहीं रह गया है।
न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन ने भी इस राय से सहमति जताने वाला एक अलग फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि एस कोडार मामले में दिया गया फैसला सही था, अब भी वैध है और उस पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है।
यह मामला अर्जुन फ्लोर मिल्स के नेतृत्व में दायर अपीलों से जुड़ा था। इनमें उड़ीसा बिक्री कर अधिनियम, 1947 और पंजाब सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1948 के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई थी, जिनके तहत निर्धारित कारोबार सीमा पूरी करने वाले कारोबारियों पर देय बिक्री कर का 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया जाता था।
करदाताओं का तर्क था कि पहले से देय कर के आधार पर अतिरिक्त कर लगाना 'कर पर कर' लगाने जैसा है और संविधान के तहत राज्य विधानसभाओं को ऐसा कर लगाने का अधिकार नहीं है।
संविधान पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कर का विषय और उसकी गणना का आधार दो अलग-अलग बातें हैं। अधिभार की गणना देय बिक्री कर की राशि के प्रतिशत के आधार पर किए जाने मात्र से उसका स्वरूप नहीं बदल जाता। वह वस्तुओं की बिक्री या खरीद पर लगाया जाने वाला कर ही रहता है।
फैसले के मुताबिक, संविधान के 101वें संशोधन के बाद जीएसटी व्यवस्था लागू होने से केंद्र और राज्यों के बीच कर लगाने की शक्तियों के बंटवारे में व्यापक बदलाव आया है। संबंधित पुराने बिक्री कर कानूनों की जगह पहले मूल्य वर्धित कर (वैट) और बाद में जीएसटी व्यवस्था लागू हो चुकी है।
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