लातूर, पांच नवंबर (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा कपास के आयात पर मौजूदा सीमा शुल्क छूट की अवधि 31 दिसंबर तक बढ़ाए जाने के फैसले के विरोध में किसानों के एक संगठन ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के लातूर जिले में प्रदर्शन किया। संगठन ने आरोप लगाया कि इस फैसले से घरेलू कपास उत्पादकों को नुकसान होगा।
क्रांतिकारी शेतकरी संगठन ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए औसा तहसील कार्यालय के सामने सरकार के फैसले की प्रति जलाई।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कसबे ने दावा किया कि इस फैसले से विदेशों से बड़े पैमाने पर कपास का आयात बढ़ेगा, जिससे घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में गिरावट आएगी।
उन्होंने कहा, ''पहले से ही सूखे की मार झेल रहे किसानों पर इससे और बोझ पड़ेगा, क्योंकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। केंद्र की नीतियों का उद्देश्य कपास और सोयाबीन दोनों की कीमतों को गिराना है।''
केंद्र सरकार ने पिछले महीने कपास के आयात पर मौजूदा सीमा शुल्क छूट को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया था। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने 30 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी।
सरकार ने मई में कपास के आयात को पांच महीने के लिए, यानी 31 अक्टूबर 2026 तक, सीमा शुल्क से छूट दी थी। अब इस छूट की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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