नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश में दखल देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसके तहत श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के 16 निलंबित छात्रों को दी गई सेमेस्टर परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति रद्द कर दी गई थी।
हालांकि, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ से आग्रह किया कि वह निलंबन को चुनौती देने वाली छात्रों की लंबित याचिका का जल्द से जल्द निपटारा करे।
पीठ ने विश्वविद्यालय के इस आश्वासन को दर्ज किया कि अगर उच्च न्यायालय का फैसला छात्रों के पक्ष में आता है, तो संस्थान उनके लिए विशेष परीक्षाएं आयोजित करेगा, ताकि उनके शैक्षणिक हितों पर कोई असर न पड़े।
निलंबित छात्रों ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के तीन नवंबर के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था। खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के 30 अक्टूबर के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें छात्रों को सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी।
याचिकाकर्ता छात्रों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीवी दिनेश ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को बिना किसी जांच के 64 दिनों से निलंबित रखा गया है, जिससे यह कार्रवाई दंडात्मक प्रकृति की हो गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय जानबूझकर कार्यवाही में देरी कर रहा है और ऐसी स्थिति पैदा कर रहा है, जिसमें छात्रों के पास परीक्षा देने का मौका ही नहीं बचेगा।
विश्वविद्यालय की ओर से पेश अधिवक्ता पीएस सुधीर ने छात्रों की अर्जी का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि छात्रों ने परीक्षा में बैठने के लिए जरूरी न्यूनतम उपस्थिति की शर्त पूरी नहीं की है।
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा, “विश्वविद्यालय का अपना अनुशासन होता है।”
दिनेश ने बताया कि छात्रों ने परिसर में खराब पड़ी लाइट और माइक्रोफोन सिस्टम की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली थी, ताकि बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान दिलाया जा सके, लेकिन विश्वविद्यालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।
विश्वविद्यालय ने न्यायालय को बताया कि छात्रों की उस रिट याचिका को 17 नवंबर को एकल न्यायाधीश के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, जिसमें उनके निलंबन को चुनौती दी गई थी।
पीठ ने कहा, “हम इसमें दखल नहीं देना चाहते। एकल न्यायाधीश से अनुरोध है कि वह इस मामले को जल्द से जल्द हाथ में लें और इसका निपटारा करें।”
उसने विश्वविद्यालय के इस आश्वासन को दर्ज किया कि अगर उच्च न्यायालय का फैसला छात्रों के पक्ष में आता है, तो संस्थान उनके लिए विशेष परीक्षाएं आयोजित करेगा।
याचिकाकर्ता छात्र ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) से जुड़े हुए हैं। उन्हें 13 अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान घटी घटना की जांच के चलते एक सितंबर को निलंबित कर दिया गया था।
विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया कि छात्रों ने कुलपति का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया, उनके साथ बदसलूकी की और उनके वाहन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। वहीं, छात्रों का कहना है कि उनका विरोध-प्रदर्शन खराब पड़ी स्टेज लाइट के खिलाफ था।
भाषा पारुल नरेश
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