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कुलसेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट से रॉकेट प्रक्षेपण अगले साल शुरू होगा : इसरो प्रमुख

चेन्नई, पांच नवंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख वी नारायणन ने बृहस्पतिवार को कहा कि कुलसेकरपट्टिनम स्पेसपोर्ट से रॉकेट प्रक्षेपण अगले साल शुरू हो जाएगा।

चेन्नई स्थित पेरियार विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र में सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन की प्रतिमा के अनावरण के बाद नारायणन ने कहा कि नये प्रक्षेपण केंद्र पर निर्माण कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के तटीय गांव कुलसेकरपट्टिनम में 28 फरवरी 2024 को भारत के दूसरे स्पेसपोर्ट की आधारशिला रखी थी।

नारायणन ने संवाददाताओं से कहा, “तमिलनाडु सरकार ने लगभग 2,300 एकड़ जमीन अधिग्रहित करके हमें सौंप दी है। वहां काम सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। अगले साल वहां से एक रॉकेट प्रक्षेपित किया जाएगा।”

इसरो प्रमुख ने रूसी महावाणिज्य दूत वालेरी खोजायेव और केंद्र के कार्यकारी निदेशक शनमुगसुंदरम के साथ मिलकर 12 अप्रैल 1961 को गागरिन की ऐतिहासिक अंतरिक्ष उड़ान की याद में बनाई गई प्रतिमा का औपचारिक अनावरण किया।

नारायणन ने भारत के अंतरिक्ष प्रयासों, खास तौर पर महत्वाकांक्षी मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान मिशन ‘गगनयान’ के लिए मॉस्को की ओर से लगातार दिए जा रहे समर्थन के प्रति आभार जताया।

उन्होंने कहा, “इस अभियान के लिए रूस की ओर से काफी सहयोग मिला है। मैं इस मौके पर भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए सहयोग देने के वास्ते महावाणिज्य दूत और पूरी रूसी टीम को धन्यवाद देना चाहता हूं।”

नारायणन ने कहा कि गगारिन की प्रतिमा को देखकर छात्र समुदाय में भारी उत्साह, स्पष्ट लक्ष्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा होगा।

रूसी महावाणिज्य दूत खोजायेव ने भारत और रूस के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि गगारिन की प्रतिमा का अनावरण अत्यंत प्रतीकात्मक है, क्योंकि यह पहली मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुआ है।

उन्होंने कहा, “हम इसे न केवल यूरी गगारिन को श्रद्धांजलि देने के रूप में देखते हैं, बल्कि यह अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उच्च स्थिति, एक ‘अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था’और ‘अंतरिक्ष शक्ति’ के रूप में भारत की पहचान तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में रूस-भारत सहयोग का भी प्रमाण है।”

भाषा पारुल नरेश

नरेश