नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि वह उच्च शिक्षण संस्थानों में समता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2026 के नियमों की पुनः समीक्षा के लिए एक विशेष समिति का गठन कर रही है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार विद्यार्थियों की चिंताओं का समाधान करने के उपायों पर विचार कर रही है और साथ ही, यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि नियामक ढांचे के तहत छात्र समुदाय का कोई भी वर्ग खुद को उपेक्षित, असुरक्षित या आशंकित महसूस न करे।
विधि अधिकारी ने कहा, ‘‘सरकार एक समिति का गठन करने पर विचार कर रही है।’’
प्रधान न्यायाधीश ने प्रत्येक विद्यार्थी के हितों की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया और याचिकाओं पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।
उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान युवा पीढ़ी की चिंताओं, उनके कल्याण और हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
यह मामला ‘अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ’ और इससे संबंधित अन्य याचिकाओं से जुड़ा है।
वर्ष में 2019 में दायर यह याचिका रोहित वेमुला और पायल तडवी की माताओं द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने परिसरों में कथित तौर पर जातिगत भेदभाव के कारण आत्महत्या कर ली थी।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
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