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अगले साल 68.4 प्रतिशत पेशेवर बदलना चाहते हैं नौकरी: सर्वेक्षण

मुंबई, पांच नवंबर (भाषा) रोजगार बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत के 68.4 प्रतिशत पेशेवरों ने 2027 में सक्रिय रूप से नई नौकरी तलाशने की योजना बनाई है। एक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई है।

नौकरी और पेशेवर नेटवर्किंग मंच फाउंडइट के ‘करियर रीसेट सर्वेक्षण 2027’ के अनुसार, करियर में आगे बढ़ने, अधिक वेतन और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल हासिल करने की आकांक्षा पेशेवरों के नौकरी संबंधी फैसलों को प्रभावित कर रही है। सर्वेक्षण में शामिल 94.1 प्रतिशत लोगों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर उन्हें अच्छी नौकरी मिलने का भरोसा है।

यह सर्वेक्षण देशभर के 9,951 पेशेवरों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है।

सर्वेक्षण के मुताबिक, 40.3 प्रतिशत लोगों ने नौकरी बदलने की सबसे बड़ी वजह करियर में आगे बढ़ने के अवसरों को बताया। इसके बाद 29.7 प्रतिशत ने अधिक वेतन और 20.3 प्रतिशत ने बेहतर कार्य-जीवन संतुलन को नौकरी बदलने की वजह बताया।

हालांकि, वेतन नौकरी बदलने का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। सर्वेक्षण में शामिल 51.5 प्रतिशत पेशेवरों ने कहा कि वे कम से कम 31 प्रतिशत वेतन वृद्धि मिलने पर ही नौकरी बदलने पर विचार करेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, 18.1 प्रतिशत पेशेवर अपनी मौजूदा नौकरी में बने रहने के साथ ही दूसरी नौकरियों के अवसरों पर भी विचार कर रहे हैं, जबकि केवल 3.7 प्रतिशत ने अपने मौजूदा संगठन में ही आगे बढ़ने की योजना जताई।

फाउंडइट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) तरुण सिन्हा ने कहा, ‘‘भारत के पेशेवर 2027 में करियर में आगे बढ़ने और लंबे समय तक रोजगार के योग्य बने रहने को लेकर अपनी सोच में स्पष्ट बदलाव के साथ प्रवेश कर रहे हैं। नौकरी बाजार में व्यापक अनिश्चितता के बावजूद नए अवसर तलाशने का भरोसा मजबूत बना हुआ है। उल्लेखनीय बात यह है कि तत्काल आर्थिक लाभ के मुकाबले करियर में आगे बढ़ने को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है, हालांकि वेतन को लेकर अपेक्षाएं अब भी ऊंची हैं।’’

उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े कौशल हासिल करने पर बढ़ता जोर दर्शाता है कि पेशेवर समझ रहे हैं कि नौकरियों की भूमिकाओं में बदलाव के साथ उन्हें लगातार अपने कौशल को विकसित करना होगा।

सिन्हा ने कहा, ‘‘नियोक्ताओं के लिए अब चुनौती केवल प्रतिभाओं को आकर्षित करने की नहीं है, बल्कि उनके लिए आगे बढ़ने के सार्थक अवसर तैयार करने, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप क्षमताएं विकसित करने और भर्ती प्रक्रिया को कार्यबल की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप बनाने की भी है।’’

भाषा योगेश अजय

अजय