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खनन से मिलने वाले राजस्व का 94-96 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को मिलता है: रेड्डी

(फाइल फोटो के साथ)

पणजी, पांच नवंबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र सरकार खनन गतिविधियों से कोई राजस्व नहीं जुटाती है और इस क्षेत्र से होने वाली आय का 96 प्रतिशत तक हिस्सा राज्य सरकारों को मिलता है।

उन्होंने साथ ही कहा कि यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।

कोयला एवं खान मंत्री ने गोवा में खान मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि खनन क्षेत्र को लेकर केंद्र का दृष्टिकोण राजस्व जुटाने पर आधारित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश के विकास के लिए जरूरी खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम या जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) से कोई पैसा नहीं मिलता है। खनिजों पर एकत्रित जीएसटी (माल एवं सेवा कर) का 50 प्रतिशत हिस्सा ही केंद्र के पास आता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि भारत सरकार खनन क्षेत्र से कोई राजस्व नहीं ले रही है। खनन से जो भी राजस्व मिलता है, उसका 94 से 96 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारों को जाता है और यह व्यवस्था जारी रहेगी।’’

मंत्री ने कहा कि गैर-कोयला खनन से राज्य सरकारों का राजस्व 2014-15 में करीब 13,000 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्तमान में 70,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि डीएमएफ से होने वाला पूरा संग्रह राज्य सरकारों को मिलता है। इस कोष के तहत करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये जमा हुए हैं।

रेड्डी ने कहा, ‘‘चाहे नीलामी प्रीमियम हो, रॉयल्टी हो या डीएमएफ, केंद्र इन स्रोतों से एक रुपया भी नहीं लेता है। यह राजस्व राज्यों का है।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार खनन क्षेत्र से राजस्व जुटाने के बजाय विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के जरिये इसमें निवेश कर रही है।

कोयला गैसीकरण पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने इस क्षेत्र की परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 46,000 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रोत्साहन निर्धारित किए हैं। महत्वपूर्ण खनिजों का मजबूत तंत्र विकसित करने में भी सरकार पर्याप्त धन निवेश कर रही है।

मंत्री ने कहा कि सरकार खोज, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण को शामिल करते हुए महत्वपूर्ण खनिजों का मजबूत घरेलू तंत्र विकसित करने पर काम कर रही है।

रेड्डी ने यह भी कहा कि भारत ने एक अरब टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि प्रमुख खनिजों के उत्पादन का मूल्य पिछले दशक में चार गुना बढ़कर 2025 में 1.89 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

मंत्री ने बताया कि खनन क्षेत्र ने देश में करीब 1.3 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। इसके अलावा, इससे जुड़ी गतिविधियों के जरिये बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित हुआ है।

उन्होंने कहा कि प्रमुख खनिजों के उत्पादन का मूल्य 2025 में 1.89 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले 10 वर्षों में चार गुना वृद्धि दर्शाता है।

भाषा निहारिका अजय

अजय