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मतदान पूर्व सर्वेक्षणों के परिणाम रहे बेहतर, नतीजों का सही अनुमान लगाने में काफी हद तक सफल

( डब्ल्यू जोसेफ कैंपबेल, स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन, अमेरिकन यूनिवर्सिटी)

वाशिंगटन, पांच नवंबर (द कन्वरसेशन) मतदान पूर्व सर्वेक्षणों की सबसे अहम कसौटी यह है कि वे मोटे तौर पर यह संकेत दे पाते हैं या नहीं कि मतदाता किसके पक्ष में मतदान करने वाले हैं। इस बुनियादी कसौटी पर 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले कराए गए सर्वेक्षण काफी हद तक सफल रहे। उन्होंने मतदान के दिन सामने आने वाले नतीजों का सही अनुमान लगाया।

हालांकि सर्वेक्षणों ने कुछ झिझक के साथ ही सही, लेकिन कुल मिलाकर डेमोक्रेटिक पार्टी को महत्वपूर्ण बढ़त मिलने के संकेत दिए थे। मतदान के नतीजों में भी यही देखने को मिला।

संभवतः 2008 में बराक ओबामा के राष्ट्रपति चुनाव में जीत का सटीक अनुमान लगाने के बाद यह सर्वेक्षणों का सबसे भरोसा जगाने वाला प्रदर्शन रहा। उस चुनाव के नतीजे का उल्लेख मेरी पुस्तक ‘लॉस्ट इन अ गैलप: पोलिंग फेल्योर इन यूएस प्रेसिडेंशियल इलेक्शंस’ में भी किया गया है।

दो पुरानी मान्यताओं की फिर हुई पुष्टि

इसका यह अर्थ नहीं है कि 2026 के मतदान पूर्व सर्वेक्षणों ने मतगणना शुरू होने से पहले ही नतीजों का बिल्कुल सटीक अनुमान लगा लिया था। ऐसा लगता है कि कुछ सीनेट निर्वाचन क्षेत्रों में उन्होंने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन का वास्तविक स्तर कम आंका था।

हालांकि, सर्वेक्षणों से बिल्कुल सटीक नतीजों की उम्मीद करना उचित नहीं है, भले ही ऐसी सटीकता वांछनीय हो। इसकी वजह यह है कि जनमत सर्वेक्षणों में कई तरह की त्रुटियां आ सकती हैं। हाल के राष्ट्रीय चुनावों में सर्वेक्षणों का अनुमान ऊपर-नीचे रहा है। ऐसे में सर्वेक्षण करने वाली एजेंसियों और मीडिया विश्लेषकों ने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में अपने आकलन पेश करते समय काफी सतर्कता बरती।

मिसाल के तौर पर, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के मुख्य राजनीतिक विश्लेषक नैट कोहन ने चुनाव से ठीक पहले लिखा था, ‘‘यह सवाल उठाना वाजिब है कि क्या सर्वेक्षण एक बार फिर डेमोक्रेटिक पार्टी की ताकत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे हैं। इसकी पूरी संभावना है। राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थकों के सर्वेक्षणों में हिस्सा लेने की संभावना अपेक्षाकृत कम रहती है। इससे सर्वेक्षणों के गलत साबित होने का जोखिम हमेशा बना रहता है।’’

हालांकि, इस बार यह आशंका ज्यादातर गलत साबित हुई और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा।

वर्ष 2026 के मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान पूर्व सर्वेक्षणों ने अमेरिकी राजनीति की एक पुरानी मान्यता की पुष्टि की। इसके मुताबिक, मध्यावधि चुनावों में आमतौर पर उस पार्टी के उम्मीदवारों को नुकसान उठाना पड़ता है, जिसकी सरकार केंद्र में होती है।

एक अन्य पुरानी मान्यता की भी फिर पुष्टि हुई। इसके अनुसार, मध्यावधि चुनावों से पहले किसी राष्ट्रपति की लोकप्रियता का स्तर अक्सर देश के राजनीतिक मिजाज को समझने में उपयोगी साबित होता है। ‘रियल क्लियर पॉलिटिक्स’ की ओर से संकलित सर्वेक्षण आंकड़ों के मुताबिक, चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता 40 प्रतिशत या उससे नीचे बनी हुई थी।

ट्रंप की ओर से शुरू किया गया ईरान के खिलाफ अमेरिका का युद्ध उनकी कम लोकप्रियता की एक बड़ी वजह था। यह संघर्ष अब तब सुलझ नहीं पाया है और इसी दौरान ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे आम उपभोक्ताओं को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

सर्वेक्षण विश्लेषक नैट सिल्वर ने इन समस्याओं और अन्य मुद्दों पर गौर करते हुए लिखा था कि ट्रंप ‘‘मध्यावधि चुनावों में अपनी हार खुद ही तय करते नजर आ रहे हैं। उनकी एक बड़ी ताकत यह है कि वह राष्ट्रपति चुनावों के दौरान ऐसे मतदाताओं को भी मतदान के लिए प्रेरित कर लेते हैं, जिनके नियमित रूप से मतदान करने की संभावना कम होती है और जिन्हें सर्वेक्षणों में अक्सर शामिल नहीं किया जा पाता। लेकिन ट्रंप के खुद चुनावी मैदान में न होने पर उनकी यह ताकत कभी खास काम नहीं आई है।’’

इस बार भी ऐसा ही हुआ। हालांकि, पूरे चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने अपने समर्थकों से यह मानकर मतदान करने की अपील की कि वह स्वयं उम्मीदवार हैं।

सर्वेक्षणों में चूक के मामले कम रहे

मतदान से ठीक पहले के दिनों में सर्वेक्षणों का बारीकी से विश्लेषण करने पर उनके आकलनों में कुछ अंतर नजर आए। कुछ चुनाव क्षेत्रों में अलग-अलग सर्वेक्षणों के अनुमान के बीच काफी बड़ा फासला था।

मिसाल के तौर पर, क्या चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में टेक्सास में सीनेट के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार केन पैक्सटन एक अंक से आगे थे या सात अंक से पीछे? पैक्सटन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको से दोहरे अंकों के अंतर से हार गए। किसी भी सर्वेक्षण एजेंसी ने हार के इतने बड़े अंतर का अनुमान नहीं लगाया था।

इसी तरह, क्या मेन में लंबे समय से सीनेटर रहीं रिपब्लिकन उम्मीदवार सुसान कॉलिन्स दो अंक से आगे थीं या नौ प्रतिशत अंक से पीछे थीं? नतीजे दूसरे अनुमान के ज्यादा करीब रहे। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ट्रॉय जैक्सन ने उन्हें छह अंक से अधिक के अंतर से हराया।

मिनेसोटा में डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेट उम्मीदवार पैगी फ्लानागन 14 अंक से आगे थीं या महज दो प्रतिशत अंक से? चुनाव के अगले दिन तक अधिकांश मतों की गिनती हो चुकी थी और फ्लानागन की जीत का अंतर करीब 10 अंक था।

बड़े चुनाव क्षेत्रों में सर्वेक्षणों के बीच इस तरह के अंतर याद दिलाते हैं कि किसी एक सर्वेक्षण पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय सभी सर्वेक्षणों के औसत पर गौर करना चाहिए। ऐसा करने से असामान्य या अन्य सर्वेक्षणों से काफी अलग नतीजों का प्रभाव कम हो जाता है या खत्म हो जाता है।

इन सबका यह अर्थ नहीं है कि सर्वेक्षण करने वाली एजेंसियों ने नमूने चुनने से जुड़ी अपनी पुरानी समस्याओं का समाधान कर लिया है। खासकर उन मतदाताओं तक पहुंचने और उनका साक्षात्कार लेने की समस्या अब भी बनी हुई है, जिनसे संपर्क करना मुश्किल होता है। हालांकि, इस चुनाव में सर्वेक्षणों की बड़ी चूकों के मामले कम रहे। ऐसी ही एक चूक टेक्सास के गवर्नर चुनाव में देखने को मिली, जहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जीना हिनोजोसा ने दोहरे अंकों के अंतर से जीत हासिल की, जबकि सर्वेक्षणों में रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट को कुछ अंकों की बढ़त दिखाई गई थी।

इस बीच, मतदाताओं का व्यापक रुझान सर्वेक्षणों में स्पष्ट रूप से सामने आया, भले ही वे उसका बिल्कुल सटीक अनुमान नहीं लगा पाए।

यह नतीजा सर्वेक्षण करने वालों के लिए निश्चित रूप से राहत और उत्साह बढ़ाने वाला है। उन्हें अक्सर आलोचनाओं और सवालों का सामना करना पड़ता है।

द कन्वरसेशन

खारी मनीषा

मनीषा