नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) भारत ने पारंपरिक हथियारों पर क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तर पर नियंत्रण से संबंधित पाकिस्तान प्रायोजित संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि भारत का लंबे समय से यह रुख रहा है कि हथियारों का नियंत्रण एक वैश्विक मुद्दा है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं हैं।
भारत और इजराइल ने इस सप्ताह प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। हालांकि, अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच किसी तरह के कूटनीतिक समन्वय की धारणा को सिरे से खारिज किया।
उन्होंने कहा कि इस मतदान को एक संयुक्त रुख बताना, 'बारीकियों को समझने की गंभीर कमी' को दर्शाता है।
उन्होंने क्षेत्रीय निरस्त्रीकरण (1993), पारंपरिक हथियारों के नियंत्रण (1999) और पारंपरिक सैन्य विश्वास बहाली के उपाय (2017 ) पर निरस्त्रीकरण आयोग के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में 'पारंपरिक संतुलन' की धारणा भारत को स्वीकार्य नहीं है।
पाकिस्तान और बेलारूस की ओर से संयुक्त रूप से पेश किए गए 'सामान्य एवं पूर्ण निरस्त्रीकरण : क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तर पर पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण' शीर्षक वाले प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति ने सोमवार को मंजूरी दे दी। प्रस्ताव के पक्ष में 180 मत पड़े जबकि दो देशों ने इसके विरोध में मतदान किया। किसी भी देश ने मतदान में हिस्सा नहीं लेने का विकल्प नहीं चुना।
अधिकारियों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में मुख्य रूप से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित 'क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तर पर पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण' संबंधी प्रस्ताव के संबंध में भारत का रुख पिछले करीब तीन दशक से एक जैसा रहा है।
भाषा प्रचेता अविनाश
अविनाश