पणजी, पांच नवंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए गोवा निवासी परेश सालगांवकर और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों के नाम मतदाता सूची में बहाल किए जाएं।
न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर की पीठ ने सांताक्रूज विधानसभा क्षेत्र के निवासी सालगांवकर और उनके परिवार के सदस्यों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने को चुनौती दी थी। उनका पता बदलने के लिए दिया गया फॉर्म-8 आवेदन खारिज कर दिया गया था।
सालगांवकर और उनके परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता विवेक रोड्रिग्स ने संवाददाताओं को बताया कि उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के नाम 10 दिन के भीतर मतदाता सूची में बहाल करने का आदेश दिया है।
रोड्रिग्स ने कहा कि याचिकाकर्ता (सालगांवकर) का नाम पहले मतदाता सूची में था और वह 1995 से मतदान करते आ रहे थे, लेकिन आवास बदलने के कारण उनका नाम सूची से हटा दिया गया।
उन्होंने कहा कि पता बदलने के लिए फॉर्म-8 दाखिल करने के बावजूद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। वकील ने कहा कि सालगांवकर और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं रहने दिए गए।
रोड्रिग्स के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने निर्वाचन आयोग के समक्ष अपील भी दायर की थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने मुंबई उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद निर्वाचन आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता गौरीश अग्नि ने आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने तक फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया। हालांकि, उच्च न्यायालय ने अनुरोध खारिज कर दिया।
पीठ ने कहा, ''हम इस आदेश में दिए गए निर्देशों पर रोक लगाने से इनकार करते हैं, क्योंकि ये निर्देश मतदाता सूची में याचिकाकर्ताओं को मतदाता के रूप में शामिल करने से संबंधित हैं। इसलिए अनुरोध खारिज किया जाता है।''
सालगांवकर और उनके परिवार के सदस्यों ने इस साल सितंबर में उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की थी। मामले में सुनवाई 28 सितंबर को शुरू हुई थी।
भाषा अमित पवनेश
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