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गोकुल गतिरोध का महाराष्ट्र सरकार ही समाधान निकाल सकती है: मंत्री मुश्रीफ

मुंबई, पांच नवंबर (भाषा) महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने गोकुल डेयरी के नेतृत्व को लेकर उत्पन्न गतिरोध में राज्य सरकार के हस्तक्षेप का बृहस्पतिवार को यह कहते हुए बचाव किया कि लोकतांत्रिक कामकाज बहाल करने और प्रशासन निर्वाचित प्रतिनिधियों के हाथों में सौंपने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।

आमतौर पर 'गोकुल डेयरी' के नाम से चर्चित कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ सरकार के एक फैसले के बाद चर्चा में आ गया है। इस फैसले के तहत, एक ऐसे पैनल को डेयरी का नियंत्रण मिल सकता है, जिसमें कांग्रेस समर्थित पैनल की तुलना में एक सदस्य कम है।

सरकार के फैसले की हो रही आलोचना का जवाब देते हुए मुश्रीफ ने कहा,‘‘अगर लोकतंत्र को बचाना है और प्रशासन को 25 निर्वाचित सदस्यों को सौंपना है तो इस गतिरोध को सुलझाना ही था। इसे केवल सरकार ही सुलझा सकती थी।’’

इस मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘एक्स’ पर किए एक पोस्ट पर निशाना साधते हुए, मुश्रीफ ने कहा कि कांग्रेस नेता इस मामले को समझ नहीं पाए हैं।

गोकुल डेयरी के हालिया चुनाव में, कांग्रेस समर्थित पैनल ने 13 सीट जीतीं, जबकि भाजपा, राकांपा और शिवसेना वाले महायुति गठबंधन समर्थित दूसरे पैनल को 12 सीट मिलीं।

मुश्रीफ ने बताया कि अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका, क्योंकि महायुति समर्थित पैनल के सदस्य बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे जरूरी कोरम (सदस्यों की न्यूनतम संख्या) पूरा नहीं हो पाया।

इस बीच, राज्य सरकार ने बुधवार को 500 करोड़ रुपये से अधिक का सालाना कारोबार करने वाली सहकारी संस्थाओं की प्रबंध समितियों में, सरकार द्वारा नामित पांच सदस्यों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। इससे गोकुल डेयरी में स्थिति 'महायुति' समर्थित पैनल के पक्ष में झुक सकती है।

कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने 13 सीट जीतने वाले पैनल का नेतृत्व किया था। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार का यह कदम गोकुल डेयरी पर कब्ज़ा करने की एक चाल थी।

पाटिल के अनुसार, गोकुल लगभग 5.5 लाख किसानों से रोजाना करीब 20 लाख लीटर दूध इकट्ठा करता है और उन्हें हर 10 दिन में लगभग 100 करोड़ रुपये का भुगतान करता है।

मुश्रीफ के अनुसार, कानून में कोरम का प्रावधान है और इस शर्त को पूरा किए बिना गोकुल डेयरी के अध्यक्ष का चुनाव नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि गोकुल डेयरी के मामले में, 25 बोर्ड सदस्यों में से 14 सदस्यों का होना (कोरम) जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का चुनाव बार-बार न हो पाने की स्थिति में, एक प्रशासक की नियुक्ति की जा सकती है, जिसके बाद लागू नियमों के तहत नए सिरे से चुनाव कराए जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘गोकुल में यह गतिरोध पैदा हुआ है। किसी अन्य सहकारी संस्था में ऐसी स्थिति कभी नहीं पैदा हुई।’’

मंत्री ने सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने निर्वाचित बहुमत को बैठकों में शामिल होने और अपना अध्यक्ष चुनने से नहीं रोका है।

भाषा

राजकुमार गोला

गोला