नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को संकटग्रस्त रियल एस्टेट कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स की पूरी हो चुकी परियोजनाओं के मौजूदा आवंटियों के पक्ष में 'कन्वेयंस डीड' निष्पादित करने की अनुमति दे दी।
'कन्वेयंस डीड' एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके माध्यम से किसी संपत्ति का मालिकाना हक बिल्डर या विक्रेता से खरीदार को औपचारिक रूप से हस्तांतरित किया जाता है।
शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही कंपनी और उससे जुड़ी इकाइयों के बैंक खातों पर रोक लगाने संबंधी 13 जुलाई के अपने आदेश में आंशिक छूट दी, ताकि बिजली बिलों और कर्मचारियों के बकाये का भुगतान किया जा सके।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने दिवाला कार्यवाही का सामना कर रही कंपनी के ऋणदाता वित्तीय संस्थानों को आवश्यक खर्चों के भुगतान के लिए समाधान पेशेवर (आरपी) को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने 13 जुलाई को पार्श्वनाथ डेवलपर्स को घर खरीदारों के अधिकारों की ''खुली अवहेलना'' करने के लिए कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने पार्श्वनाथ हेस्सा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड और उनके निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज करने का आदेश दिया था। साथ ही, घरों का कब्जा पाने के लिए 20 वर्षों से संघर्ष कर रहे वरिष्ठ नागरिकों की परेशानी को देखते हुए कंपनी के नेतृत्व के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए थे।
बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलों पर गौर किया।
दीवान ने कहा कि समाधान पेशेवर को परेशान घर खरीदारों की शिकायतों के समाधान के लिए कुछ कदम उठाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
पीठ ने स्पष्ट किया कि हस्तांतरण विलेख (कन्वेयंस डीड) निष्पादित करने की अनुमति केवल आवंटन के उचित सत्यापन के बाद ही दी जाएगी।
उसने यह भी साफ किया कि इस अनुमति का इस्तेमाल संपत्तियों में किसी तीसरे पक्ष के अधिकार सृजित करने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
भाषा योगेश अजय
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