मुंबई, पांच नवंबर (भाषा) वित्तीय संस्थानों की तरफ से सोने पर दिए जाने वाले कर्ज (स्वर्ण ऋण) में दबाव बढ़ रहा है। क्रेडिट सूचना कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल ने बृहस्पतिवार को कहा कि 90 दिन से अधिक समय से बकाया स्वर्ण ऋण का अनुपात मार्च, 2026 के मुकाबले दोगुना होकर अगस्त महीने में 0.30 प्रतिशत पर पहुंच गया।
सिबिल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में तेजी के बीच वित्तीय संस्थानों ने स्वर्ण ऋण देने में काफी रुचि दिखाई है। अगस्त, 2026 तक तीन वर्षों में वित्तीय संस्थानों का स्वर्ण ऋण पोर्टफोलियो तीन गुना बढ़कर 22.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। करीब 5.5 करोड़ लोग स्वर्ण ऋण चुका रहे हैं, यानी कर्ज लेने वाले सक्रिय ग्राहकों में हर पांचवां व्यक्ति इस श्रेणी में है।
हालांकि, हालिया तिमाही में इस क्षेत्र में कुछ सुस्ती के संकेत दिखे हैं। इस दौरान स्वर्ण ऋण की संख्या सालाना आधार पर 15 प्रतिशत घटकर 3.7 करोड़ रही। इसके बावजूद मंजूर ऋण की कुल राशि 12 प्रतिशत बढ़कर 8.2 लाख करोड़ रुपये हो गई। इससे संकेत मिलता है कि कर्ज की औसत राशि बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में 2.5 लाख रुपये से अधिक के स्वर्ण ऋण की मंजूर राशि में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्योग में प्रति कर्ज की औसत राशि बढ़कर 4.1 लाख रुपये हो गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया विस्तार नए कर्जदारों की संख्या बढ़ने के बजाय मौजूदा ग्राहकों के बार-बार कर्ज लेने और बड़ी राशि के कर्ज लेने से प्रेरित है।
पिछले तीन वर्षों में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने स्वर्ण ऋण बाजार की वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभाई है और कर्ज देने की संख्या के लिहाज से वे सबसे बड़ा खंड बनी हुई हैं।
हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी अपनी स्थिति मजबूत की है। स्वर्ण ऋण की कुल संख्या में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई है, जबकि मंजूर ऋण की कुल राशि में उनकी हिस्सेदारी करीब आधी है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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