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वीबी-जी राम जी के तहत चारा उत्पादन और पशुधन संबंधी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए परामर्श जारी

नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक संयुक्त परामर्श जारी किया है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में चारे की सुरक्षा, चरागाहों के विकास और पशुधन को सहायता देने वाले बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत 22 अनुमत कार्यों की पहचान की गई है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत ग्रामीण विकास विभाग और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने संयुक्त रूप से विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को बढ़ावा देने के लिए यह परामर्श जारी किया।

एक बयान में कहा गया कि इस परामर्श में अधिनियम के ढांचे के तहत अनुमत 375 कार्यों की सूची में से 22 प्रासंगिक कार्यों की पहचान की गई है। इनमें चारे की खेती और भंडारण, चरागाहों का विकास, पशुओं के लिए आश्रय स्थल, डेयरी संबंधी बुनियादी ढांचा और पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं।

इन कार्यों में व्यक्तिगत परिवारों और समुदायों के लिए चारे की खेती, सामुदायिक चारा संसाधनों, चरागाहों और चराई की भूमि का विकास, सिल्वी-पास्चर (वृक्षों और चरागाहों का एकीकृत विकास), चारा बैंक और साइलेज (साइलेज पशुओं के लिए एक ऐसा पौष्टिक आहार है, जिसे हरे चारे (जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा, जई आदि) को हवा की अनुपस्थिति में किण्वित करके बनाया जाता है।) इकाइयां शामिल हैं।

अन्य कार्यों में पशुओं के आश्रय स्थलों का निर्माण, मरम्मत और रखरखाव, सामुदायिक दुग्ध संग्रह केंद्रों और पशु चिकित्सा केंद्रों का निर्माण, सामुदायिक मवेशी एवं पशु जलपान कुंड और व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए एजोला टैंक का निर्माण शामिल है।

एक जुलाई, 2026 से लागू हुए वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है। यह अधिनियम चार विषयगत क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करता है, जिनमें आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचा और चरम मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम करना शामिल है।

बयान में कहा गया है कि ग्राम पंचायतें उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे सकती हैं, जहां 30 प्रतिशत से अधिक आबादी पशुधन पर निर्भर है।

इस परामर्श में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से ग्रामीण विकास, पशुपालन, कृषि और अन्य संबंधित क्षेत्रों के विभागों के बीच समन्वय के माध्यम से चारे की सुरक्षा और पशुधन संबंधी बुनियादी ढांचे के लिए व्यापक राज्य कार्ययोजनाएं तैयार करने का आह्वान किया गया है।

इसमें जलवायु के अनुकूल उपायों को भी प्रोत्साहित किया गया है। इनमें उपयुक्त चारा किस्में, बारहमासी घास और एकीकृत फसल-पशुधन प्रणालियां शामिल हैं, जहां ये प्रासंगिक हों और अनुमत कार्यों के दायरे में आती हों।

भाषा गोला नरेश

नरेश