नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने धन शोधन के दो मामलों में हिरासत में मौजूद अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत या अभिरक्षा पैरोल की याचिका पर बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा।
सिद्दीकी ने अपनी बीमार पत्नी की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत या अभिरक्षा पैरोल का अनुरोध किया है।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने याचिका पर ईडी को नोटिस जारी किया और सिद्दीकी की ओर से जमा कराए गए चिकित्सा दस्तावेजों का सत्यापन कर शुक्रवार को अदालत को सूचित करने को कहा।
अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता के वकील की ओर से जताई गई तात्कालिकता को देखते हुए मामले को छह नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।’’
सिद्दीकी ने चिकित्सा और मानवीय आधार पर एक हफ्ते की अंतरिम जमानत का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी को ‘स्टेज 4’ का ‘ओवेरियन कैंसर’ है और 10 नवंबर को उनकी कीमोथेरेपी का अगला चरण होना है।
उनके वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि अपनी पत्नी के आगे के इलाज के लिए सिद्दीकी को चिकित्सकों से सलाह लेनी है इसलिए उन्हें एक हफ्ते की अंतरिम जमानत दी जाए।
वकील ने यह भी कहा कि अगर जमानत नहीं मिल सकती तो उन्हें अभिरक्षा पैरोल दी जाए।
अभिरक्षा पैरोल का मतलब है कि कैदी को हथियारबंद पुलिसकर्मियों की निगरानी में उस जगह ले जाया जाता है, जहां उसे जाने की अनुमति दी गई हो।
ईडी ने अंतरिम जमानत की याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि सिद्दीकी के फरार होने का खतरा है।
इससे पहले जुलाई में उच्च न्यायालय ने सिद्दीकी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था लेकिन उन्हें अभिरक्षा पैरोल पर तीन अलग-अलग तारीखों पर अपनी पत्नी से मिलने की अनुमति दी थी।
सिद्दीकी को धन शोधन के दो मामलों में गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक मामला फरीदाबाद स्थित उसके शैक्षणिक संस्थान में छात्रों से ली गई फीस से कथित तौर पर अवैध धन जुटाने से जुड़ा है।
उसे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज इस मामले में 18 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
ईडी की यह जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज दो प्राथमिकी पर आधारित है। इन प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने छात्रों और उनके अभिभावकों को गुमराह करने के लिए गलत तरीके से राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से मान्यता और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता प्राप्त होने का झूठा दावा किया था।
ईडी ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये जुटाए और छात्रों से वसूली गई रकम का इस्तेमाल निजी उद्देश्यों के लिए किया गया।
इसके बाद ईडी ने सिद्दीकी को दिल्ली में 45 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल करने से जुड़े धन शोधन के एक नए मामले में भी गिरफ्तार किया।
‘सफेदपोश आतंकवाद’ की जांच के दायरे में अल-फलाह यूनिवर्सिटी भी आ गई जिसमें उससे जुड़े दो चिकित्सकों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, विश्वविद्यालय के अस्पताल से जुड़े एक अन्य डॉक्टर उमर-उन-नबी की पहचान 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के बाहर हुए विस्फोट में आत्मघाती हमलावर के रूप में की गई थी। इस विस्फोट में 15 लोगों की मौत हुई थी।
भाषा सुरभि मनीषा
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