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कीनन-रूबेन हत्याकांड: अदालत ने तीन लोगों की दोषसिद्धि बरकरार रखी, दो लोग हत्या के आरोप से बरी

मुंबई, पांच नवंबर (भाषा) मुंबई में महिलाओं से छेड़छाड़ का विरोध करने पर दो युवकों की हत्या की घटना के 15 साल बाद बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मामले में तीन आरोपियों की दोषसिद्धि बरकरार रखी लेकिन आरोपियों में से दो को हत्या के आरोप से बरी कर दिया।

न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की पीठ ने जितेंद्र राणा को हत्या के अपराध में दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा लेकिन 2016 में विशेष अदालत द्वारा उसे सुनाई गई उम्रकैद की सजा को घटाकर 20 साल के कारावास में बदल दिया।

पीठ ने दो अन्य आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया लेकिन उन्हें मामूली रूप से चोट पहुंचाने के अपराध में दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही, 2016 में विशेष अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई एक साल की सजा को भी बरकरार रखा।

कीनन सैंटोस (24) और रूबेन फर्नांडिस (29) की 20 अक्टूबर, 2011 को मुंबई के अंधेरी इलाके के अंबोली में एक खाने पीने की दुकान के बाहर चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों ने अपनी दो महिला मित्रों से छेड़छाड़ कर रहे लोगों के एक समूह का विरोध किया था।

विशेष अदालत ने 2016 में इस मामले में जितेंद्र राणा, सतीश दुलगज, सुनील बोथ और दीपक पिवाल को हत्या तथा अन्य अपराधों का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

उच्च न्यायालय में दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित रहने के दौरान एक आरोपी दुलगज की मौत हो गई।

विशेष अदालत ने राणा और दुलगज को हत्या के अलावा छेड़छाड़ के आरोप में भी दोषी ठहराया था।

उच्च न्यायालय ने हत्या के अपराध के लिए राणा की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को 20 साल के कारावास में बदल दिया।

अदालत ने कहा, ‘‘उसकी उम्र को देखते हुए (घटना के समय राणा 25 साल का था) हम उम्रकैद की सजा घटाकर 20 साल का कारावास कर रहे हैं लेकिन इसमें कोई रियायत नहीं मिलेगी।’’

पीठ ने दो अन्य आरोपियों - बोथ और पिवल - को हत्या के आरोप से बरी कर दिया क्योंकि उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हुआ।

हालांकि, अदालत ने उन्हें मामूली रूप से चोट पहुंचाने के अपराध में दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई एक साल की सजा जारी रहेगी।

अगर इन दोनों के खिलाफ कोई और मामला लंबित नहीं है तो इनके जेल से रिहा होने की संभावना है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सैंटोस और फर्नांडीज ने आरोपियों का सामना किया और उनमें से एक को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए वहां से चले गए। इसके बाद वे चाकू, क्रिकेट स्टंप और एक बड़ा डंडा लेकर वापस लौटे और ‘‘जानलेवा हमला’’ कर दिया।

बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि कथित छेड़छाड़ की घटना कभी हुई ही नहीं थी और यह लड़ाई तब शुरू हुई जब पीड़ितों ने आरोपियों में से एक को थप्पड़ मार दिया।

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा