नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को पुलिस को निर्देश दिया कि यौन उत्पीड़न के मामले में कांग्रेस सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के बर्खास्त प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ कोई भी सख्त कार्रवाई करने से पहले उन्हें सात दिन का नोटिस दिया जाए।
कांग्रेस सांसद की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने कहा कि अगर प्रोफेसर की गिरफ्तारी जरूरी हो तो उन्हें पहले नोटिस दिया जाना चाहिए।
अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार है।
इससे पहले मंगलवार को अदालत ने दिल्ली पुलिस से इस मामले में जवाब मांगा था।
जेएनयू ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के कारण अकोइजम को अक्टूबर में बर्खास्त कर दिया था। हालांकि, प्रोफेसर ने अपनी बर्खास्तगी को ‘‘प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई’’ करार दिया है और उचित प्रक्रिया का पालन किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं।
दिल्ली पुलिस ने सेवा से बर्खास्त किए जाने के कुछ दिन बाद 12 अक्टूबर को इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
खबरों के अनुसार मई में कम से कम 11 छात्राओं ने प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अकोइजम बैठकों या समारोहों के बहाने छात्राओं को परिसर स्थित अपने आवास पर बुलाते थे और उनका यौन उत्पीड़न करने का प्रयास करते थे। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि वह कक्षाओं के दौरान अश्लील और अनुचित टिप्पणियां करते थे।
जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (सीएसओ) द्वारा दी गई शिकायत और दस्तावेजों के आधार पर वसंत कुंज उत्तर थाने में इस संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
प्राथमिकी के अनुसार, विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति (आईसी) के सदस्यों ने आंतरिक जांच के बाद अपना आकलन और टिप्पणियां पुलिस को भेजी थीं।
शिकायत में सीएसओ ने बताया कि आईसी ने कई शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की और इस मामले में अपने निष्कर्ष, मूल्यांकन और टिप्पणियों को दर्ज किया।
प्राथमिकी में कहा गया है, ‘‘जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के ‘सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ सोशल सिस्टम्स’ के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ लगे आरोपों की जांच आंतरिक समिति ने की है। समिति ने गवाहों, बचाव पक्ष के गवाहों और रिकॉर्ड में मौजूद अन्य सामग्री का मूल्यांकन किया है।’’
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो नवंबर को प्रोफेसर अकोइजम की सेवाएं समाप्त करने के जेएनयू प्रशासन के फैसले पर रोक लगा दी थी। अदालत ने बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती देने वाली कांग्रेस सांसद की याचिका पर विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया था। इस मामले पर जनवरी में सुनवाई होगी।
भाषा सुरभि मनीषा
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