वेटिकन सिटी, पांच नवंबर (एपी) फेफड़ों के कैंसर की सर्जरी के ठीक तीन सप्ताह बाद पोप लियो 14वें अपने कार्यकाल की अब तक की सबसे लंबी और दूरगामी यात्रा पर जाने वाले हैं। लातिन अमेरिका के तीन देशों की उनकी यह 12 दिवसीय यात्रा अब तक के उनके सभी दौरों की तुलना में अधिक व्यक्तिगत और ऐतिहासिक महत्व रखती है।
अमेरिका में जन्मे 71 वर्षीय पोप लियो अपने पुराने घर पेरू जाएंगे। उन्होंने वहां एक मिशनरी पादरी के तौर पर दो दशक बिताए हैं। लियो के पास पेरू की नागरिकता भी है। वह वहां के लोगों से इतना गहरा लगाव रखते हैं कि पोप चुने जाने की रात सेंट पीटर गिरजाघर की बालकनी से उन्होंने विशेष रूप से स्पेनिश भाषा में उनका उल्लेख किया था।
लियो अर्जेंटीना भी जाएंगे, जो उनके पूर्ववर्ती पोप फ्रांसिस का गृह देश है। पोप लियो अपने कार्यकाल का श्रेय भी काफी हद तक फ्रांसिस को देते हैं। अर्जेंटीना की यात्रा उनके लिए एक तरह से घर वापसी जैसी होगी। फ्रांसिस 2013 में पोप चुने जाने के बाद कभी अपने गृह देश नहीं गए थे।
पोप लियो अपनी यात्रा की शुरुआत शुक्रवार को उरुग्वे से करेंगे। यह पूरे लातिन अमेरिका का सबसे कम कैथोलिक आबादी वाला और सबसे अधिक धर्मनिरपेक्ष देश है। वहां कैथोलिक धर्म के प्रमुख त्योहारों को भी आधिकारिक मान्यता प्राप्त नहीं है। उरुग्वे में क्रिसमस को आधिकारिक तौर पर ‘फैमिली डे’ और पवित्र सप्ताह को ‘टूरिज्म वीक’ कहा जाता है।
इसके बावजूद पूरी यात्रा के दौरान पोप की एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ जुटने का अनुमान है। इस दौरान वह अपने कार्यकाल से जुड़े कई प्रमुख मुद्दों को भी उठा सकते हैं। इनमें आर्थिक अन्याय, आदिवासी समुदायों और अमेजन क्षेत्र की बदहाली आदि शामिल हैं।
हालांकि, लोगों की उत्सुकता इस बात को लेकर भी है कि 13 अक्टूबर को फेफड़े से कैंसर का ट्यूमर निकालने के लिए हुई सर्जरी के महज तीन सप्ताह बाद पोप ने इतनी लंबी और थकाऊ यात्रा पर जाने का फैसला कैसे किया।
चिकित्सकों ने कहा कि लियो को आगे किसी उपचार की जरूरत नहीं है और यह भी स्पष्ट किया कि छह से 17 नवंबर तक की इस यात्रा पर न जाने की कोई चिकित्सकीय वजह नहीं है। पोप विमान और हेलीकॉप्टर के जरिए करीब 31 हजार किलोमीटर की यात्रा करेंगे। यह उनके कार्यकाल की अब तक की सबसे लंबी यात्रा होगी।
एपी खारी मनीषा
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