चंडीगढ़, चार नवंबर (भाषा) पंजाब में पराली जलाने के 'अत्यधिक मामलों' पर गंभीर रुख अपनाते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के उपायों की समीक्षा के लिए बुधवार को 12 जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों के सीएक्यूएम अध्यक्ष राजेश वर्मा ने की। इसमें राज्य के पर्यावरण सचिव, कृषि सचिव और 12 जिलों के उपायुक्तों (डीसी) तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) ने भाग लिया।
सोमवार और मंगलवार के बीच, पंजाब में पराली जलाने के 584 नए मामले सामने आए, जो केवल एक दिन में हुई भारी बढ़ोतरी को दर्शाता है।
बैठक में शामिल डीसी और एसएसपी फिरोजपुर, संगरूर, बठिंडा, पटियाला, बरनाला, फरीदकोट, जालंधर, फाजिल्का, लुधियाना, मलेरकोटला, मोगा और मानसा जिलों से थे।
तकनीकी सदस्य के नेतृत्व में सीएक्यूएम की एक उच्चस्तरीय टीम जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करने के लिए पहले से ही बठिंडा में मौजूद है।
आयोग ने निर्देश दिया कि निगरानी और प्रवर्तन अभियान को तेज किया जाए तथा निगरानी में कमी और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में विफलता के लिए नोडल अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए।
आयोग ने दोहराया कि किसी भी लापरवाही के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, तीन नवंबर तक पंजाब में पराली जलाने की कुल घटनाएं बढ़कर 2,196 हो गईं, जबकि सोमवार को यह संख्या 1,612 थी।
भाषा सुमित वैभव
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