(शिरीष बी. प्रधान)
काठमांडू, चार नवंबर (भाषा) विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की आगामी भारत यात्रा की तैयारियों के तहत अपने नेपाली समकक्ष अमृत बहादुर राय के साथ दोनों देशों के आपसी हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बुधवार को बातचीत की।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद कहा, ‘‘द्विपक्षीय वार्ता में उच्चस्तरीय यात्राओं, संपर्क सुविधाओं, व्यापार, विकास के क्षेत्र में सहयोग, ऊर्जा और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध समेत नेपाल-भारत संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों पर जोर दिया गया।’’
नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मिसरी ने प्रधानमंत्री शाह की आगामी भारत यात्रा की तैयारियों के सिलसिले में अपने नेपाली समकक्ष के साथ आपसी हित के विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।
सूत्रों के अनुसार, नेपाल और भारत के विदेश मंत्रालय प्रधानमंत्री शाह की आगामी भारत यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं।
मार्च में पदभार संभालने के बाद प्रधानमंत्री शाह की किसी पड़ोसी देश की यह पहली यात्रा होगी।
दूतावास ने बताया कि मिसरी नेपाल के विदेश सचिव राय के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा पर आए हैं। उन्होंने नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से भी शिष्टाचार भेंट की और आगामी उच्चस्तरीय बैठकों के जरिए दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने तथा मित्रता के पुराने संबंधों को प्रगाढ़ बनाने से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
मंत्रालय के अनुसार, खनाल ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच घनिष्ठ संबंध ‘‘नयी ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे।’’
मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने ऊर्जा, व्यापार, खेल और शिक्षा समेत द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की तथा इस दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत करने तथा ऐतिहासिक मित्रता को प्रगाढ़ बनाने पर जोर दिया गया।
सूत्रों ने बताया कि मिसरी के प्रधानमंत्री शाह से भी मुलाकात करने की संभावना है। शाह संभवत: नवंबर के अंतिम सप्ताह में आधिकारिक यात्रा पर भारत जाएंगे।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, मिसरी ने वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले से भी शिष्टाचार भेंट की और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग पर चर्चा की।
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वित्त मंत्री वाग्ले के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के उपायों पर विस्तार से विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
मिसरी ने नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ से भी मुलाकात की। भारतीय दूतावास ने कहा, ‘‘बैठक में जारी परियोजनाओं और पहलों की समीक्षा की गई तथा ऊर्जा और जल संसाधन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई।’’
ऊर्जा मंत्री के सचिवालय के अनुसार, बैठक में ऊर्जा व्यापार, जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण, आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और पूर्व चेतावनी प्रणालियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
श्रेष्ठ ने हाल में आई आपदाओं के दौरान नेपाल को लगातार सहयोग देने के लिए भारत का आभार जताया। उन्होंने भारत से बिजली व्यापार बढ़ाने, नेपाल में सहायता परियोजनाओं को पूरा करने और निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ाने का भी अनुरोध किया।
ऊर्जा मंत्री के कार्यालय के अनुसार, मिसरी ने कहा कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में नेपाल के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है।
मिसरी ने नेपाल के अवसंरचना विकास मंत्री सुनील लमसाल से भी मुलाकात की। भारतीय दूतावास ने कहा कि लमसाल ने बुनियादी ढांचे और संपर्क सुविधाओं समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के उपायों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
क्षेत्र में भारत के व्यापक रणनीतिक हितों के लिहाज से नेपाल महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के नेता भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने ‘‘रोटी-बेटी’’ के संबंधों का अक्सर जिक्र करते रहे हैं।
चारों ओर से जमीन से घिरा नेपाल वस्तुओं और सेवाओं की ढुलाई के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर है। नेपाल को समुद्र तक पहुंच भारत के रास्ते ही मिलती है और वह अपनी जरूरत का अधिकतर सामान भारत से या भारत के रास्ते आयात करता है।
मई में शाह के उस बयान के बाद दोनों देशों के संबंधों में कुछ असहजता पैदा हो गई थी, जिसमें उन्होंने भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन को शामिल करने की बात कही थी।
भारत ने नेपाल के साथ सीमा विवाद सुलझाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा था कि सीमा संबंधी सभी मुद्दों से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच पहले से एक द्विपक्षीय व्यवस्था मौजूद है।
नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। भारत लगातार कहता रहा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं।
भाषा सिम्मी वैभव
वैभव