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न्यायालय ने भगवान नटराज मंदिर के प्रशासन के लिए बोर्ड गठित करने के अदालती आदेश पर रोक लगाई

नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत चिदंबरम स्थित प्राचीन भगवान नटराज मंदिर के प्रशासन में व्याप्त खामियों को दूर करने के लिए एक प्रबंधन बोर्ड का गठन करने को कहा गया था।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने कई ‘दीक्षितार’ (ट्रस्टी और पुजारी) द्वारा दायर अपील पर नोटिस जारी किया। उन्होंने अदालत के 30 अक्टूबर के फैसले को चुनौती दी थी।

पीठ ने कहा, ‘‘पक्षकारों के वकीलों को सुनने के बाद हमारी यह राय है कि इस फैसले पर रोक लगाई जानी चाहिए।’’

उच्च न्यायालय ने माना था कि वंशानुगत पुजारियों, जिन्हें ‘पोढू दीक्षितार’ कहा जाता है के प्रबंधन के तहत चिदंबरम स्थित प्राचीन भगवान नटराज मंदिर के प्रशासन में गड़बड़ियां हो रही थीं। इसे सुधारने के लिए उच्च न्यायालय ने एक प्रबंधन बोर्ड का गठन किया था।

उच्च न्यायालय ने मंदिर परिसर में गैर-धार्मिक व्यावसायिक गतिविधियों (जिससे मंदिर परिसर एक ‘खानपान केंद्र’ में बदल गया था) और मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने में विफलता जैसे कारणों का हवाला दिया था। अदालत ने कहा कि कुप्रबंधन की इन समस्याओं को दूर करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है।

अदालत ने कहा था कि एक पारदर्शी प्रशासन की आवश्यकता है, जो मौजूदा कुप्रबंधन को खत्म कर सके।

उच्च न्यायालय ने कहा था, ‘‘इसलिए, हम विषय विशेषज्ञों का एक प्रबंधन बोर्ड गठित कर रहे हैं, जो तब तक प्रशासन का कामकाज संभालेंगे, जब तक कि समस्या दूर नहीं हो जाती।’’

अदालत ने कहा था, ‘‘मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति वी. भारतीदासन बोर्ड के अध्यक्ष और न्यायमूर्ति आर. सुरेश कुमार सह-अध्यक्ष होंगे।’’ अदालत ने बोर्ड के अन्य सदस्यों के नाम भी तय कर दिए थे।

भाषा संतोष वैभव

वैभव