हैदराबाद, चार नवंबर (भाषा) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को केंद्र सरकार के उस रुख की आलोचना की, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी के कृषि भवन परिसर में स्थित करीब एक सदी पुरानी मस्जिद को हटाया जाना जरूरी है।
केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि सरकार के कार्यालय परिसर में स्थायी धार्मिक ढांचे का निर्माण करना या उसे बनाए रखना स्वीकार्य नहीं है और यह सरकारी संपत्ति के ‘‘धर्मनिरपेक्ष’’ स्वरूप के अनुरूप भी नहीं है।
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि सरकार ने सेंट्रल विस्टा परियोजना का उद्घाटन भूमि पूजन के साथ किया था।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि सार्वजनिक परियोजना के लिए एक धर्म की परंपराओं और अनुष्ठानों का इस्तेमाल करने से धर्मनिरपेक्षता आहत नहीं होती, लेकिन उस मस्जिद से परेशानी है जो 1912 से भी पहले से वहां मौजूद है, जबकि उस समय कृषि भवन का निर्माण भी नहीं हुआ था।’’
सरकार ने कहा है कि ‘सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान’ के तहत भूखंड संख्या 120 पर ‘साझा केंद्रीय सचिवालय’ (सीसीएस) की इमारत संख्या चार और पांच का पुनर्विकास एवं पुनर्निर्माण किया जाना है। इस भूखंड में मौजूदा शास्त्री भवन और कृषि भवन शामिल हैं। इस परियोजना का उद्देश्य सरकारी कामकाज के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना है।
उसने कहा कि सीसीएस की इमारत संख्या चार और पांच का निर्माण राष्ट्रीय महत्व की एक अत्यंत महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना है। उसने कहा कि कदीमी मस्जिद इस परियोजना की जमीन पर स्थित है और परियोजना को पूरा करने के लिए इसे हटाना जरूरी है।
भाषा शफीक माधव
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