नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को उस याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई, जिसमें कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के बकाया भुगतान से जुड़े मामले में पंजाब के मुख्य सचिव के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने पंजाब सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह की दलीलों पर गौर किया। सिंह ने कहा कि मुख्य सचिव को लगभग नियमित रूप से उच्च न्यायालय में पेश होना पड़ता है।
सिंह ने कहा कि मौजूदा राज्य सरकार को पिछली सरकार से करीब 13,000 करोड़ रुपये का बकाया विरासत में मिला है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस याचिका को बृहस्पतिवार को एक अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा, जो इसी तरह की एक याचिका पर सुनवाई कर रही है।
उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश की पीठ ने आठ अप्रैल को बकाया भुगतान संबंधी निपटान योजना को रद्द कर दिया था और 30 जून तक सभी ‘बकाया/लंबित किस्तों’ का भुगतान भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारियों के लिए लागू दरों के अनुसार करने का निर्देश दिया था।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने नयी याचिका में उच्च न्यायालय के 12 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया था कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। नोटिस पर जवाब देने के लिए 30 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी।
याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय में यह कार्यवाही एक रिट याचिका और ‘‘लेटर्स पेटेंट अपील’’ (एलपीए) के तहत दायर विविध आवेदनों के आधार पर शुरू हुई थी, जिनका पहले ही अंतिम रूप से निपटारा किया जा चुका है।
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश