नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से पेट्रोनेट एलएनजी के तीन जहाजों का परिचालन मार्च से ही लगभग ठप है। इन जहाजों के मालिकों ने कंपनी से 625.42 करोड़ रुपये और लागू करों की मांग की है जिसे कंपनी ने मध्यस्थता कार्यवाही में चुनौती दी है।
देश की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी ने जुलाई-सितंबर तिमाही के वित्तीय खुलासे में यह जानकारी दी। कंपनी के मुताबिक, जहाजों के मालिकों के दावे 31 मार्च, 2026 को 89.30 करोड़ रुपये थे, जो परिचालन लंबे समय तक बाधित रहने से बढ़कर 625.42 करोड़ रुपये हो गए।
कंपनी ने इंडिया एलएनजी ट्रांसपोर्ट कंपनी की तीन इकाइयों के साथ दीर्घकालिक किराया समझौतों के तहत 'दिशा', 'राही' और 'असीम' नाम के जहाज लिए थे। इन जहाजों का परिचालन दो मार्च से ही लगभग बंद है। इनमें से एक जहाज का इस्तेमाल जून में करीब सात दिन के लिए किया गया था।
जहाजों के मालिकों ने अपने दावों की वसूली के लिए मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू की है। पेट्रोनेट ने कहा कि कानूनी सलाह के आधार पर वह इन दावों को संबंधित समझौतों के प्रावधानों के तहत उचित नहीं मानती और इसलिए इनके लिए कोई वित्तीय प्रावधान नहीं किया है।
पेट्रोनेट ने कहा, 'मध्यस्थता कार्यवाही का अंतिम परिणाम और उसका वित्तीय असर फिलहाल तय नहीं किया जा सकता है।'
कंपनी का कतरएनर्जी एलएनजी के साथ सालाना 75 लाख टन एलएनजी की आपूर्ति का दीर्घकालिक समझौता है। मार्च में शुरू हुई अप्रत्याशित परिस्थितियां सितंबर तिमाही में भी जारी रहीं। हालांकि, कतरएनर्जी ने वैकल्पिक जहाजों के जरिये कुछ खेपों की आपूर्ति की।
पेट्रोनेट एलएनजी ने बताया कि 30 सितंबर तक ग्राहकों पर क्षमता के कम इस्तेमाल से जुड़ा कुल 408.23 करोड़ रुपये बकाया था। इसमें 230.72 करोड़ रुपये का प्रावधान करने के बाद शुद्ध बकाया 177.51 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी ने ग्राहकों के साथ समझौते के तहत सितंबर तिमाही में 252.80 करोड़ रुपये और चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कुल 311.61 करोड़ रुपये का बकाया माफ किया। कंपनी ने कहा कि वह शेष राशि की वसूली के लिए ग्राहकों से बातचीत कर रही है।
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