इंदौर (मध्यप्रदेश), चार नवंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को बुधवार को उचित ठहराते हुए कहा कि इस प्रक्रिया का मकसद इन सूचियों को त्रुटिहीन बनाना है।
उन्होंने एसआईआर के सियासी विरोध पर हैरत जताई और कहा कि राजनीतिक दलों को किसी मुद्दे पर केवल विरोध के लिए विरोध करने के बजाय उसकी सच्चाई पर ध्यान देना चाहिए।
होसबाले ने यह बात ऐसे वक्त कही, जब कथित चुनावी अनियमितताओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।
वह इंदौर में संघ के प्रमुख संगठनात्मक निकाय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक खत्म होने के बाद संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे।
होसबाले ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडा के मुताबिक काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें किसी मुद्दे पर केवल विरोध के नाम पर विरोध करने के बजाय देखना चाहिए कि उस मुद्दे में कुछ सच्चाई है भी या नहीं।
उन्होंने कहा कि एसआईआर का मकसद मतदाता सूचियों का परिष्कार (शुद्धिकरण या किसी चीज को त्रुटिहीन बनाने की प्रक्रिया) करना होता है।
होसबाले ने कहा कि देश में जिन लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं, उनमें से कई लोगों की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि कई मतदाताओं के नाम दो जगहों पर दर्ज हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग भारत के नागरिक नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूचियों में दर्ज होना आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से गलत है।
संघ के वरिष्ठ नेता ने कहा कि एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन बनाने की प्रक्रिया देश में नियमित तौर पर होती आई है और यह बात उनकी समझ से परे है कि इस पर राजनीति क्यों होनी चाहिए।
उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर इन दिनों वह बेंगलुरु में रहते हैं, तो उनका नाम उनके पैतृक गांव की मतदाता सूची से काट दिया जाना चाहिए।
होसबाले ने कहा,‘‘जब टीएन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त थे, तब उन्होंने बिहार की मतदाता सूची का परिष्कार किया था। इसमें क्या गलत था? उस समय (देश में) सरकार किसकी थी?’’
संघ महासचिव ने एक सवाल पर यह भी कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता परिवर्तन चुनावों के जरिये होता है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के मकसद की आड़ में अशांति व हिंसा फैलाना या भेदभाव उत्पन्न करना समाज के हित में नहीं है।
उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ‘जेन-जी’ आंदोलन से जुड़े सवाल पर कहा कि देश के अंदर और बाहर की कुछ ‘अराजक शक्तियां’ युवाओं को साजिश के तहत भड़काने का प्रयत्न कर रही हैं।
होसबाले ने बताया कि इंदौर में संघ की तीन दिवसीय बैठक में ‘अराजक शक्तियों’ के खिलाफ सावधानी रखने के बारे में भी चर्चा की गई है।
संघ महासचिव ने कहा,‘‘....लेकिन युवाओं के मन में जो आकांक्षाएं और बातें हैं, उनके बारे में किसी भी समाज और शासन को ध्यान देना चाहिए। संघ युवाओं के साथ संवाद किए जाने का आग्रह करता है।’’
उन्होंने कहा कि वक्त के हर दौर में युवाओं के मन में व्यवस्था के खिलाफ विचार आते हैं, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के चलते उनके दुरुपयोग की प्रवृत्तियों का संघ विरोध करता है।
काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद और मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के पिछले कई बरसों से उलझे रहने के बारे में पूछे जाने पर होसबाले ने कहा,‘‘हर चीज के लिए एक ही प्रकार से काम किया जाना चाहिए, ऐसा नहीं है। तरह-तरह से काम होते हैं। कुछ काम यदि अदालत से हो रहे हैं, तो अदालत से होने दीजिए। हर चीज पर आंदोलन करने की जरूरत नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि वाराणसी और मथुरा के इन विवादों को लेकर विशाल हिंदू समुदाय के मन की भावनाओं के आधार पर कई लोग पहले से मुद्दा उठाते हुए प्रयत्न कर रहे हैं और इस बारे में संघ कोई नया आंदोलन शुरू करने पर विचार नहीं कर रहा है।
देश में जातिगत आरक्षण की व्यवस्था को ‘ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से आवश्यक’ करार देते हुए संघ महासचिव ने कहा कि भेदभाव, पिछड़ापन, असमानताएं और विषमताएं दूर होने तक यह व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर वोट बैंक की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर भी अब तक इसका पंजीकरण नहीं कराए जाने पर होसबाले ने कहा कि यह संगठन देश के संविधान व नियम-कायदों के मुताबिक काम कर रहा है और सामाजिक हितों के लिए लोग एकजुट होकर बिना पंजीयन के भी संस्थाएं और संगठन संचालित कर सकते हैं।
भाषा हर्ष जोहेब
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