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मथुरा के धार्मिक संगठनों और नेताओं ने भगवान कृष्ण के बारे में टिप्पणी के लिए धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना की

मथुरा, चार नवंबर (भाषा) मथुरा में कई धार्मिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने भगवान कृष्ण के बारे में कथित विवादित टिप्पणी करने के लिए बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना की है।

कुछ संगठनों ने शास्त्री के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने और उनका बहिष्कार करने की मांग की है।

अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के मुख्य संरक्षक महेश पाठक ने इन टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि उनका संगठन शास्त्री के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा।

पाठक ने कहा कि भगवान कृष्ण किसी एक समाज या समुदाय के नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय दर्शन की नींव, सनातन संस्कृति की आत्मा और पूरी मानवता के मार्गदर्शक हैं।

उन्होंने कहा कि हालांकि शास्त्री ने माफी मांग ली है, लेकिन उनकी कथित अपमानजनक टिप्पणी को महज एक गलती कहकर खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे दुनियाभर के हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि श्रद्धालु भगवान कृष्ण का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि शास्त्री अहंकार और धन के घमंड में अंधे नजर आते हैं और उन्हें याद रखना चाहिए कि रावण का घमंड भी अंत में चूर हो गया था।

श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत (पुजारी) ज्ञानेंद्र गोस्वामी ने शास्त्री को धार्मिक प्रवचन देते समय मर्यादा और गरिमा बनाए रखने की सलाह दी।

गोस्वामी ने कहा कि शास्त्री की सफाई संतोषजनक नहीं थी।

उन्होंने भगवान कृष्ण के बारे में ऐसी टिप्पणी करने के उनके अधिकार पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि धार्मिक प्रवचन देने वालों को अपमानजनक टिप्पणियां करने के बजाय अपने प्रवचन पर ध्यान देना चाहिए।

राष्ट्रीय लोक दल के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि शास्त्री अज्ञानी हैं और उन्हें धर्म का पर्याप्त ज्ञान नहीं है।

सिंह ने कहा कि भगवान राम, भगवान विष्णु के अवतार थे जबकि भगवान कृष्ण स्वयं विष्णु थे, इसलिए दोनों की तुलना नहीं की जानी चाहिए।

कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंदू संगठन भगवान कृष्ण के कथित अपमान पर चुप्पी साधे हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि शास्त्री जैसे संतों को सत्ता का समर्थन मिलता है।

उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के किसी नेता ने ऐसी ही टिप्पणी की होती तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होते।

माथुर ने कहा, 'शास्त्री को वेदों और धर्मग्रंथों को फिर से ध्यान से पढ़ना चाहिए।'

कई अन्य हिंदू संगठनों और नेताओं ने इस विवाद पर चुप्पी बनाए रखी और टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

ये प्रतिक्रियाएं हाल में मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में हुई राम कथा के दौरान की गई शास्त्री की टिप्पणियों के बाद आई हैं।

उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण के स्वरूपों की तुलना करते हुए कहा था कि राम सीधे खड़े होते हैं, जबकि कृष्ण तीन जगह से मुड़े हुए खड़े होते हैं। भगवान कृष्ण की ‘त्रिभंग’ मुद्रा, उनकी बांसुरी और वृंदावन का जिक्र करते हुए उन्होंने अयोध्या और वृंदावन की भी तुलना की थी।

उनकी टिप्पणियों से विवाद खड़ा होने के बाद बागेश्वर धाम के प्रमुख पुजारी ने माफी मांगते हुए कहा कि उनका किसी भी देवी-देवता का अपमान करने का इरादा नहीं था।

शास्त्री ने सोमवार को केन्या के नैरोबी से सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि उनका भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच कोई अंतर बताने का इरादा नहीं था।

उन्होंने कहा कि यदि उनकी टिप्पणियों से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वह माफी मांगते हैं।

भाषा सं जफर जोहेब

जोहेब