नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय में बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की ‘अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ रैली में सैकड़ों विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
अभाविप ने इस रैली को कथित तौर पर देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में जुटी ‘विघटनकारी और अराजक शक्तियों’ के लिए एक जवाब बताया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में रग्बी ग्राउंड से क्रांति चौक तक मार्च निकाला।
अभाविप की दिल्ली इकाई ने पहले दावा किया था कि इस प्रदर्शन में 15,000 से अधिक विद्यार्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, अंतिम संख्या की पुष्टि अभी होनी बाकी है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि देश में चल रहे विभिन्न आंदोलनों का इस्तेमाल अशांति फैलाने और ‘‘सत्ता परिवर्तन’’ के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। उनके हाथों में तख्तियां थीं और वे नारे लगा रहे थे।
यह रैली ‘‘लोकतंत्र नहीं, भीड़तंत्र’’ के संदेश के साथ आयोजित की गयी। अभाविप ने अशांति पैदा करने के लिए लोकतांत्रिक असहमति के कथित दुरुपयोग को समाप्त करने की मांग की।
अभाविप ने आरोप लगाया कि कॉकरोच जनता पार्टी समेत कुछ विपक्षी दलों और संगठनों ने अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश की है।
उसने ‘नेहा बोरा समेत कुछ वामपंथी संगठनों और व्यक्तियों’ पर विरोध एवं असहमति के नाम पर विद्यार्थियों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
बुधवार को अभाविप सचिव आदित्य तकियार ने कहा कि विद्यार्थियों की भागीदारी राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के समर्थन में एक संदेश देगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाजनकारी विचारधाराओं और विदेशी प्रभाव के जरिए युवाओं को गुमराह करने की कोशिशें की गईं।
भाषा राजकुमार माधव
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