(फाइल फोटो के साथ)
तिरुवनंतपुरम, चार नवंबर (भाषा) केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने बुधवार को चाणक्य के ‘अर्थशास्त्र’ के एक सिद्धांत का जिक्र किया। उन्होंने कर संग्रह की तुलना एक ऐसी तितली से की जो फूल को नुकसान पहुंचाए बिना उसका रस चूस लेती है।
इस उदाहरण के जरिए उन्होंने समझाया कि कैसे उनकी सरकार बिना कर बढ़ाए राजस्व बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक रहते हुए भी वह अक्सर इस सिद्धांत का जिक्र करते थे और बाद में वित्त मंत्री का पद संभालने के बाद उन्होंने इसे लागू भी किया।
उदाहरण के तौर पर उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर कम करने का जिक्र किया।
सतीशन ने कहा कि उस समय कर में कटौती की आलोचना भी हुई थी लेकिन इसके चलते बिक्री में भारी उछाल आया। कई रिटेल आउटलेट में वाहन एक-दो महीने में ही बिक गए और उन्हें राज्य के बाहर से और गाड़ियां मंगानी पड़ीं।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर पहले वाली कर प्रणाली ही लागू रहती तो हमें क्या मिलता? बिक्री बढ़ने की वजह से हमें ज्यादा कर मिला। बिना कर बढ़ाए राजस्व बढ़ाने का यही एक तरीका है। यही हमारा समाधान है। कर बढ़ाना कोई समाधान नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए मैंने एक बार कहा था कि यह काम बिल्कुल वैसे ही होना चाहिए जैसे कोई तितली फूल को पता चले बिना उसका रस चूस लेती है। क्या अब आप समझे कि मेरा क्या मतलब था? यह विचार मेरा अपना नहीं है बल्कि चाणक्य के ‘अर्थशास्त्र’ में इसका उल्लेख है।’’
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में सतीशन ने याद दिलाया कि विधायक रहते हुए उन्होंने विधानसभा में कई बार इस सिद्धांत के बारे में बात की थी, लेकिन वित्त मंत्री बनने के बाद ही वे इसे लागू कर पाए।
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने यह बात कही थी, तो लोगों ने मेरा बहुत मजाक उड़ाया था। मुझे यह विचार पसंद आया था। विधायक रहते हुए मैंने विधानसभा में कई बार इसका जिक्र किया था। तब मैं इसे लागू नहीं कर सका लेकिन जब मैं वित्त मंत्री बना तो मैं इसे अमल में लेकर आया।’’
चाणक्य को कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है। वह मौर्य काल में चौथी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास के प्राचीन भारतीय दार्शनिक, अर्थशास्त्री और राजनीतिक सलाहकार थे। माना जाता है कि ‘अर्थशास्त्र’ की रचना उन्होंने ही की थी। उनकी यह पुस्तक शासन, अर्थव्यवस्था, कराधान और राज्य संचालन की कला पर आधारित है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ओणम के त्योहार के दौरान सरकार ने बाजार में पैसा लगाया ताकि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
भाषा सुरभि नरेश
नरेश