बेंगलुरु, चार नवंबर (भाषा) कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायरथी सुरेश ने राज्य के चारों सरकारी परिवहन निगमों की बसों के किराये में वृद्धि की घोषणा की जिसके तहत
केएसआरटीसी और बीएमटीसी की बसों के किराये में औसतन क्रमश: 23 प्रतिशत और 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। यह नयी दरें बुधवार मध्यरात्रि से लागू होंगी।
मंत्री ने बुधवार को यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने मुनाफा कमाने के लिए किराया नहीं बढ़ाया है बल्कि नुकसान कम करने और केएसआरटीसी और बीएमटीसी जैसे निगमों को बचाने के लिए ऐसा किया है।’’
उन्होंने कहा कि किराए में बदलाव एक समान प्रतिशत के आधार पर नहीं बल्कि अलग-अलग चरणों के हिसाब से तय किया गया है।
उन्होंने बताया कि चरणों के आधार पर केएसआरटीसी की बसों के किराये में चार रुपये से लेकर 16 रुपये तक की वृद्धि की गई है, जबकि साधारण बसों के किराये में अधिकतम नौ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
बीएमटीसी की बसों का न्यूनतम किराया छह रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये और अधिकतम किराया 35 रुपये से बढ़ाकर 45 रुपये कर दिया गया है। वहीं, हवाई अड्डे तक चलने वाली बसों का न्यूनतम किराया 185 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये और अधिकतम किराया 405 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये कर दिया गया है।
सुरेश ने कहा, ‘‘केएसआरटीसी के किराये में औसतन करीब 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है न कि 40 प्रतिशत। वहीं, बीएमटीसी में वित्तीय घाटा काफी अधिक होने के कारण किराये में करीब 33 से 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।’’
उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अतुल कुमार तिवारी की अध्यक्षता वाली समिति ने बस किराये में कुल 45 प्रतिशत वृद्धि की सिफारिश की थी, जबकि परिवहन निगमों के बोर्ड ने कुछ मामलों में किराये में 90 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने हालांकि सिफारिशों को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया।
परिवहन मंत्री के अनुसार, डीजल की बढ़ती कीमतों और कर्मचारियों के वेतन पर होने वाले खर्च के कारण किराये बढ़ाए गए। उन्होंने कहा कि मई 2025 के बाद से डीजल की कीमत 10.47 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 98.13 रुपये हो गई है।
उन्होंने बताया कि चारों परिवहन निगमों पर फिलहाल डीजल के 1,111.88 करोड़ रुपये के बिल बकाया हैं और वे हर साल ईंधन पर करीब 5,694 करोड़ रुपये खर्च करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘चारों परिवहन निगम घाटे में चल रहे हैं। हमने मुनाफा कमाने के लिए बसों का किराया नहीं बढ़ाया है। हमने केवल घाटा कम करने की कोशिश की है।’’
उन्होंने बताया कि इन निगमों का सालाना राजस्व करीब 14,000 करोड़ रुपये है जबकि उनका वार्षिक खर्च लगभग 16,000 करोड़ रुपये है।
मंत्री ने 'शक्ति' योजना के कारण निगमों को नुकसान होने संबंधी दावों को भी खारिज किया है। इस योजना के तहत महिलाएं सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा करती हैं।
सुरेश ने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से गलत है। सरकार महिला यात्रियों द्वारा इस्तेमाल किए गए टिकटों की भरपाई चारों निगमों को कर देती है।’’
उन्होंने कहा कि भुगतान में देरी हो सकती है लेकिन सरकार परिवहन निगमों को इसकी भरपाई कर देती है।
भाषा प्रचेता नरेश
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