नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) ओखला पक्षी अभयारण्य में एक दुर्लभ सफेद सारस देखा गया है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह मध्य एशिया में पाई जाने वाली एक दुर्लभ उप-प्रजाति है। इस सारस को देखने के लिए पक्षी प्रेमी, प्रकृतिवादी और वन्यजीव छायाकार यमुना नदी के किनारे, नोएडा के प्रवेश द्वार पर स्थित इस शहरी आर्द्रभूमि की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
वन्यजीव प्रेमियों के अनुसार, इस पक्षी को सबसे पहले एक नवंबर को पक्षी प्रेमी तेजस्वी ने देखा था, और तब से लगातार तीन दिन तक इसे देखा गया है।
पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सारस ‘सिकोनिया सिकोनिया एशियाटिका’ हो सकता है। यह एक दुर्लभ उप-प्रजाति है जो मुख्य रूप से उज्बेकिस्तान और दक्षिणी कजाकिस्तान में प्रजनन करती है, और दुनिया भर में इनकी अनुमानित संख्या 2,000 से भी कम है।
विशेषज्ञों ने बताया कि यह आबादी दक्षिण की ओर उन इलाकों में प्रवास करती है जहां वे सर्दियां बिताते हैं। ये इलाके ईरान से लेकर भारतीय उपमहाद्वीप तक फैले हुए हैं।
दिल्ली-एनसीआर में ‘व्हाइट स्टॉर्क’ (सफेद सारस) का आना एक दुर्लभ घटना मानी जाती है। इससे पहले, मार्च 1992 और फरवरी 2005 में ओखला में, 2004-05 में पलवल में, और मार्च 2019 में जेवर के पास इन्हें देखे जाने के रिकॉर्ड मौजूद हैं।
हाल में इसके दिखने से क्षेत्र के पक्षी प्रेमियों में काफी उत्साह है। कई प्रकृतिवादी और वन्यजीव छायाकार इस प्रवासी पक्षी को देखने के लिए अभयारण्य पहुंच रहे हैं।
प्रकृतिवादी और वन्यजीव छायाकार निखिल देवसर ने इस पक्षी के दिखने को पक्षी प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण पल बताया है, खासकर अगर यह पुष्टि हो जाए कि यह पक्षी मध्य एशियाई उप-प्रजाति का है।
पक्षी प्रेमी रोहित शर्मा ने कहा कि इस नजारे ने शहरी आर्द्रभूमियों और उनके आवासों को संरक्षित करने के महत्व को रेखांकित किया है।
यह पक्षी सर्दियों के मौसम में दिखा है, जब कई प्रवासी प्रजातियां उपयुक्त आवास और भोजन की तलाश में भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आती हैं।
यमुना के बाढ़ क्षेत्र में स्थित ओखला पक्षी अभयारण्य, इस क्षेत्र के पक्षियों और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि आवास है।
भाषा
नेत्रपाल पवनेश
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