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विधायक सप्रे के खिलाफ अयोग्यता याचिका पर दो महीने में फैसला लें मप्र विधानसभा अध्यक्ष : न्यायालय

नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया कि वे बागी कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला लें। यह याचिका दो साल से अधिक समय से लंबित है।

न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि दसवीं अनुसूची के तहत दायर याचिकाओं पर जल्द से जल्द फैसला किया जाना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सप्रे के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द फैसला लेने से उच्च न्यायालय के इनकार करने पर नाराजगी जताई।

मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार द्वारा जुलाई 2024 में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सप्रे ने अपनी मर्जी से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी, जिसके टिकट पर वे 2023 के विधानसभा चुनाव में चुनी गई थीं, और भाजपा में शामिल हो गईं।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने इस मामले को “एक ऐसा अहम मामला बताया, जो संविधान की दसवीं अनुसूची के लिए मौत की घंटी साबित हुआ।” उन्होंने कहा कि सप्रे ने पार्टी छोड़ दी थी और विरोधी पक्ष के लिए प्रचार कर रही थीं, फिर भी विधानसभा अध्यक्ष ने कोई कार्यवाही शुरू नहीं की।

पीठ ने पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के आरोपों का संज्ञान लिया, जिससे दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की स्थिति बनती है, और यह भी गौर किया कि यह याचिका दो साल से अधिक समय से अनिर्णीत पड़ी है।

इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने पहले सिंघार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें एक तय समय-सीमा के भीतर फैसला लेने का अनुरोध किया गया था। न्यायालय ने माना कि इसमें कोई जल्दबाजी की जरूरत नहीं है, क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष कार्यवाही चल रही है और सप्रे ने कांग्रेस से इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने की बात से इनकार किया है।

उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण से असहमति जताते हुए, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि भले ही किसी मामले में कोई फौरी तात्कालिकता न हो या विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने में अभी काफी समय बचा हो, फिर भी दसवीं अनुसूची के तहत दायर याचिकाओं पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाना चाहिए।

पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया कि वे सप्रे के खिलाफ उनके पास लंबित अयोग्यता याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला लें।

सप्रे सागर जिले के बीना से पहली बार विधायक बनी हैं और उन्होंने 2023 में कांग्रेस के टिकट पर यह सीट जीती थी।

मई 2024 में, लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान, कथित तौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में वह भाजपा में शामिल हो गईं। हालांकि, बाद में सप्रे ने कहा कि उन्होंने न तो कांग्रेस से इस्तीफा दिया और न ही औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हुईं।

भाषा प्रशांत पवनेश

पवनेश