बारपेटा (असम), चार नवंबर (भाषा) गुवाहाटी के एक होटल में गोलीबारी में जान गंवाने वालों के परिवारों ने बुधवार को मुख्य आरोपी के पुलिस गोलीबारी में मारे जाने को ‘‘ईश्वर का न्याय’’ बताया एवं कहा कि अब मृतकों की आत्माओं को शांति मिलेगी।
उन्होंने राहत की सांस भी ली और कहा कि उन्हें डर था कि अगर आरोपी छूट जाता, तो वह उन्हें निशाना बना सकता था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि असम के शिवसागर जिले में बुधवार तड़के पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करने पर घनकांता गोगोई (34) गोलीबारी में मारा गया।
गुवाहाटी के होटल 'बिलास इन' के पट्टाधारक गोगोई ने 26 अक्टूबर को होटल परिसर के अंदर छह लोगों पर गोलीबारी की। इस घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी। इनमें चार उस परिवार के सदस्य थे जो होटल का मालिक था।
गोलीबारी के शीघ्र बाद गोगोई को गिरफ्तार कर लिया गया था और उसके पास से एक पिस्तौल जब्त की गई थी।
मृतकों की पहचान भूदेव भराली (65), उनकी बहन हेलेना (58), हेलेना के बेटे देबर्षि कश्यप (39) और बहू रिनिका कश्यप (30), तथा परिवार के कर्मचारी नारायण दास (48) के रूप में हुई थी।
इस गोलीबारी में भराली परिवार का चालक सत्येंद्र पाठक (43) भी घायल हो गया।
शिवसागर पुलिस ने मंगलवार को गोगोई को 2024 के एक बैंक धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया। इससे कुछ घंटे पहले ही, गुवाहाटी की एक अदालत ने होटल में गोलीबारी के मामले में उसकी सात दिन की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद उसे जेल भेज दिया था।
अधिकारियों ने बताया कि उसे आगे की जांच के लिए शिवसागर ले जाया जा रहा था।
भूदेव और हेलेना की बुजुर्ग मां ने यहां अपने घर पर पत्रकारों से कहा, ‘‘अब उनकी आत्माओं को शांति मिलेगी। उनके परिवार के रूप में, हमें भी कुछ शांति मिलेगी। हमें यह न्याय दिलाने के लिए मैं ईश्वर को धन्यवाद देना चाहती हूं। मुझे भगवान पर पूरा भरोसा था कि न्याय जरूर होगा।’’
भूदेव भराली की बेटी ने कहा, ‘‘हम असम के लोगों का उनके समर्थन और एकजुटता के लिए आभारी हैं। दुख की इस घड़ी में भी, आरोपी की मौत की खबर से हमें कुछ राहत मिली है। ईश्वर ने हमें न्याय दिया है।’’
परिवार के एक अन्य सदस्य ने बताया कि अब उन्हें राहत महसूस हो रही है, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर गोगोई जिंदा रहता या बाद में छूट जाता, तो वह उन्हें फिर से निशाना बना सकता था।
पाठक की मां ने कहा, ‘‘ हमें अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंता थी। अब गोगोई की मौत के बाद, हमें काफी हद तक राहत मिली है।’’
भाषा राजकुमार अविनाश
अविनाश
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