कोलकाता, चार नवंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के संशोधित पाठ्यक्रम में वैदिक गणित और प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणालियों को शामिल किया जा सकता है, जबकि राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम में चाणक्य नीति को जगह मिल सकती है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप की जा रही है। सरकार द्वारा गठित एक समिति के सदस्य ने बुधवार को यह जानकारी दी।
कल्याणी विश्वविद्यालय के कुलपति और समिति के सदस्य कल्लोल पाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि एनईपी 2020 के अनुरूप राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक समान मॉडल और दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
पाल ने कहा, “वैदिक सिद्धांतों और उन शास्त्रीय विचारों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा, जो वर्तमान समय में प्रासंगिक हैं।”
उन्होंने कहा, “हम 21वीं सदी में पहुंच चुके हैं और प्राचीन काल में उपलब्ध गणितीय ज्ञान से काफी आगे निकल आए हैं। उन विषयों को इतिहास के हिस्से के रूप में रखा जा सकता है, लेकिन आधुनिक गणित, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में हुए विकास पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए था।”
यह पहल केंद्र सरकार की भारतीय ज्ञान प्रणाली रूपरेखा का हिस्सा है, जिसे विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में पहले से ही छात्रों को पढ़ाया जा रहा है।
संपर्क किए जाने पर पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा, “सरकार फिलहाल इस तरह की कोई भी जानकारी आधिकारिक तौर पर साझा नहीं कर सकती।”
भाषा तान्या प्रशांत
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