मदुरै (तमिलनाडु), चार नवंबर (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने तर्कवादी नेता ई. वी. रामसामि ‘पेरियार’ की प्रतिमा चार सप्ताह के भीतर मंदिर की जमीन से हटाकर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने का निर्देश तंजावुर के जिलाधिकारी को दिया है।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रतिमा प्राधिकारियों से बिना अनुमति के लगायी गई थी।
न्यायमूर्ति पी. वेलमुरुगन और न्यायमूर्ति के. के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने एक रिट याचिका पर सुनवाई के बाद तंजावुर जिले के तिरुवैयारु तालुक के कंदियुर स्थित ‘अरुलमिगु ब्रह्मश्रीकंदेश्वर मंदिर’ की जमीन से प्रतिमा हटाने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता रामा रविकुमार ने अपनी याचिका में हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के संयुक्त आयुक्त की सिफारिश के आलोक में उच्च न्यायालय द्वारा तय समयसीमा के भीतर प्रतिमा को हटाने का अनुरोध किया था।
अदालत ने अपने हालिया आदेश में कहा कि तंजावुर जिलाधिकारी द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रतिमा को सरकारी जमीन पर नहीं, बल्कि मंदिर की जमीन पर स्थापित किया गया था।
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘चूंकि प्रतिमा को मंदिर प्राधिकारियों या जिलाधिकारी अथवा किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लिये बिना मंदिर की जमीन पर स्थापित किया गया था, इसलिए चौथे प्रतिवादी/जिलाधिकारी को निर्देश दिया जाता है कि वह आज से चार सप्ताह की अवधि के भीतर मंदिर की जमीन से उक्त प्रतिमा को सुरक्षित रूप से हटाएं और इसे किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित करके रिपोर्ट पेश करें।’’
अदालत ने रजिस्ट्री को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए इस मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
सुधारवादी द्रविड़ नेता एवं समाज सुधारक ई. वी. रामसामि (1879-1973) को सम्मानस्वरूप ‘पेरियार’ कहा जाता है और उनकी इस प्रतिमा को दशकों पहले मंदिर की परिधि के पास स्थापित किया गया था।
भाषा खारी अमित
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