गोरखपुर, चार नवंबर (भाषा) कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर अराजकता का माहौल बनाने तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर विपक्षी दल इसका श्रेय अपनी मेहनत को देते हैं, लेकिन हारने पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) एवं संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं।
गोरखपुर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के दौरान आयोजित रैली को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि चुनाव में हार के बाद ईवीएम को दोष देना विपक्ष की प्रवृत्ति बन गई है।
उन्होंने सवाल किया कि यदि ईवीएम की विश्वसनीयता पर संदेह है तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी उसी व्यवस्था से चुनाव जीतने के बाद लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ क्यों लेते हैं।
कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, राज्य मंत्री एवं निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद एवं अन्य मंत्री और राजग के नेता मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही है, बल्कि पूर्व में भी अलग-अलग समय पर, विशेषकर कांग्रेस सरकारों के दौरान, ऐसी कवायद की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची से बांग्लादेशी घुसपैठियों, पाकिस्तानी नागरिकों और मृत व्यक्तियों के नाम हटाने की प्रक्रिया पर विपक्ष अनावश्यक हंगामा कर रहा है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में विदेशी घुसपैठियों के नाम शामिल होने से गरीबों, दलितों और वंचित भारतीयों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित होते हैं।
योगी ने कहा कि कांग्रेस, इंडिया गठबंधन और उनके सहयोगियों को इस मुद्दे पर देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर लोकतंत्र को मजबूत करने के बजाय अराजकता फैलाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला मानी जाने वाली संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने 1975 में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने देश में आपातकाल लगाया था, वही आज लोकतंत्र की बात कर रही है। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से आपातकाल के लिए जनता से माफी मांगने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की यह पदयात्रा केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
भाषा जफर मनीषा रंजन
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