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सीबीआई ने ब्रिटेन की कंपनी से जुड़े एक्जिम बैंक के एक करोड़ डॉलर के ‘घोटाले’ में प्राथमिकी दर्ज की

नयी दिल्ली, चार नवंबर (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने ब्रिटेन की एक कंपनी, उसके पूर्व निदेशकों और सहयोगियों से जुड़े ‘इंडियन एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक’ (एक्जिम बैंक) के कथित एक करोड़ डॉलर के धोखाधड़ी मामले में मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

जांच एजेंसी ने ‘इंडिया एक्जिम बैंक’ के सहायक महाप्रबंधक जी. सेल्व कुमार की शिकायत पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक के साथ की गई धोखाधड़ी के कारण 29 सितंबर 2014 तक एक करोड़ डॉलर (लगभग 63 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ। इस अवधि के दौरान इस ऋण खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित किया गया था।

प्राथमिकी में ब्रिटेन की कंपनी ‘हैंजर बायोटेक (एरिथ) लिमिटेड (अब बंद हो चुकी है), उसके पूर्व निदेशकों व जमानतदार, ‘नवी इन्फ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (एनआईईपीएल), ‘ह्यूम सिंथेसिस प्राइवेट लिमिटेड’ और अज्ञात लोक सेवकों को आरोपी बनाया गया है।

आरोप है कि ‘हैंजर बायोटेक’ ने ब्रिटेन में अपनी पुनर्चक्रण परियोजना के लिए मशीनरी की आपूर्ति हेतु नवी इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ एक समझौता किया था।

प्राथिमिकी के अनुसार, ‘‘ऋणदाता कंपनी ने उक्त परियोजना के लिए बैंक से कर्ज की मांग की थी। कंपनी द्वारा सौंपी गई परियोजना की कुल लागत 1.59 करोड़ डॉलर थी, जिसे प्रवर्तकों के 59 लाख डॉलर के अंशदान और शेष राशि को एक्जिम बैंक से ऋण के रूप में वित्तपोषित किया जाना प्रस्तावित था।’’

शिकायत में कहा गया कि मुंबई में बैंक की कार्यकारी समिति ने 2012 में एक करोड़ डॉलर के मियादी ऋण को मंजूरी दी थी।

आरोप है कि मशीनरी की आपूर्ति कभी की ही नहीं गई और उसकी खरीद के लिए मिली अग्रिम राशि को ‘ह्यूम सिंथेसिस’ सहित अन्य संबंधित संस्थाओं को ऋण देकर दूसरी जगह इस्तेमाल किया गया।

प्राथमिकी के अनुसार, एक करोड़ डॉलर की पूरी ऋण राशि का गबन कर लिया गया।

शिकायत में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों के तहत इस खाते को 2014 में एनपीए घोषित किया गया और बाद में इसे ‘धोखाधड़ी’ की श्रेणी में डाल दिया गया।

भाषा खारी नरेश

नरेश