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‘सिख विरोधी दंगों के लिए आप माफी कब मांगेंगे?’ राहुल गांधी की संगरूर रैली से पहले पंजाब भाजपा का सवाल

चंडीगढ़, चार नवंबर (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संगरूर में प्रस्तावित ‘इंसाफ रैली’ से पहले भारतीय जनता पार्टी की पंजाब इकाई ने बुधवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर गांधी परिवार से माफी मांगने की मांग की। भाजपा ने इस मुद्दे पर लोगों को दंगों की कथित भयावह सच्चाई से अवगत कराने के उद्देश्य से ‘जख्म 84 दे’ सम्मेलन भी शुरू किया।

भाजपा के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य दंगों के पीड़ितों, प्रत्यक्षदर्शियों, कानूनी विशेषज्ञों और राजनीतिक नेताओं को एक मंच पर लाकर नरसंहार से जुड़ी परिस्थितियों, कथित साजिश, कानूनी लड़ाई और पीड़ितों के पुनर्वास पर चर्चा करना है।

सम्मेलन की शुरुआत पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया ने 1984 के सिख नरसंहार पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन करके की। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी इस अवसर पर मौजूद थे। उद्घाटन सत्र की शुरुआत शहीदों की आत्मिक शांति और न्याय की कामना के लिए अरदास के साथ हुई।

पत्रकारों से बातचीत में ढिल्लों ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली आयोजित करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तारीख ने 1984 की हिंसा के जख्म फिर से हरे कर दिए हैं।

उन्होंने कहा, ''अब राहुल गांधी संगरूर आ रहे हैं। पीड़ितों के जख्म फिर से ताजा होंगे। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि गांधी परिवार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के लिए अब तक माफी क्यों नहीं मांगी? 42 साल बीत चुके हैं। आप कब पश्चाताप करेंगे?''

उन्होंने सवाल किया कि गांधी परिवार को सिखों से क्या दुश्मनी है और कहा कि उसने आज तक सिख समुदाय से माफी नहीं मांगी है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी राहुल गांधी से 1984 के दंगों को लेकर सवाल किए।

उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर 1984 को सिखों का नरसंहार हुआ था और राहुल गांधी के दिवंगत पिता एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उस समय कहा था कि ''जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।''

प्रसाद ने राहुल गांधी से पूछा कि क्या वह अपने पिता की इस टिप्पणी को सही मानते हैं या गलत। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस पर ईमानदारी से जवाब देना चाहिए।

प्रसाद ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार संसद में माफी मांगी थी, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि उनके पास निर्णय लेने की शक्ति नहीं थी और यह शक्ति सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी के पास थी।

उन्होंने सवाल किया कि क्या सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कभी सिख नरसंहार के लिए माफी मांगी है। प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने लंदन में यह कहकर घटना का बचाव किया था कि कांग्रेस पार्टी इसमें शामिल नहीं थी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अक्सर चर्चा की बात करते हैं और अब उन्हें इन सवालों का जवाब देना चाहिए। यदि वह जवाब नहीं देते हैं तो इसे घटना को उचित ठहराने के रूप में देखा जाएगा।

प्रसाद ने आरोप लगाया कि पी.वी. नरसिंह राव और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकारों ने दंगों की जांच के लिए कोई ईमानदार प्रयास नहीं किया।

उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दौरान नानावती आयोग का गठन किया गया था। बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया, जिसके बाद कई जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा गया। प्रसाद ने कहा कि वह वरिष्ठ अधिवक्ता और देश के पूर्व कानून मंत्री हैं तथा उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में अपने सिख भाइयों की ओर से सज्जन कुमार के खिलाफ मुकदमे की पैरवी करने का अवसर और सम्मान मिला।’’

भाजपा के वरिष्ठ नेता आर.पी. सिंह ने भी कांग्रेस से माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी ने कांग्रेस से एक नवंबर को रैली आयोजित नहीं करने की अपील की थी, लेकिन राहुल गांधी खुद को राजा समझते हैं और उन्हें लगता है कि उनके फैसले को बदला नहीं जा सकता।

सिंह ने कहा, ''यदि राहुल गांधी में जरा भी मानवीय संवेदना होती तो वह सिख नरसंहार के लिए माफी मांगते।''

राहुल गांधी की बुधवार को प्रस्तावित ‘इंसाफ रैली’ के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद को पहले 1984 के दंगों के बारे में बोलना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से पीड़ितों के घर जाकर माफी मांगने की भी अपील की।

राहुल गांधी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के प्रचार अभियान की शुरुआत करने संगरूर जिले के फगुवाल गांव जा रहे हैं। रैली में उनके आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर राज्य की कानून-व्यवस्था और नशीले पदार्थों की समस्या को लेकर निशाना साधने की उम्मीद है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी रैली में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि रैली के बाद राहुल गांधी मादक पदार्थों से जुड़ी हिंसा के पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे।

यह सम्मेलन भाजपा द्वारा कांग्रेस की एक नवंबर की रैली के आयोजन के नैतिक अधिकार पर सवाल उठाए जाने के कुछ दिन बाद आयोजित किया गया। भाजपा ने आरोप लगाया था कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़की हिंसा के लिए कांग्रेस ने अब तक जवाबदेही तय नहीं की है।

भाषा मनीषा रंजन

रंजन