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उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर हादसे के स्थल तक पहुंचने में पर्वतारोहियों की मदद लेने पर विचार

देहरादून, तीन नवंबर (भाषा) उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने मंगलवार को कहा कि वह चमोली जिले के जोशीमठ में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने वाली जगह तक पहुंचने और हादसे की जांच में मदद के लिए पेशेवर पर्वतारोहियों की सेवाएं लेने पर विचार कर रहा है।

जांचकर्ता दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए हेलीकॉप्टर में लगे कैमरे कोखोजने की कोशिश कर रहे हैं। बदरीनाथ धाम से देहरादून लौटते समय हुए इस हादसे में पायलट और कर्नाटक के पांच श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि जोशीमठ के चाईं गांव के पास हुई दुर्घटना स्थल का निरीक्षण करने गयी विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की टीम के एक अधिकारी की सोमवार शाम को तबियत अचानक बिगड़ गयी जिसके बाद राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) को उन्हें कंधों पर उठाकर पांडुकेश्वर लाना पड़ा ।

जांच में मदद के लिए सोमवार को यूकाडा की पांच सदस्यीय एक अन्य टीम जोशीमठ भेजी गई थी, लेकिन इस टीम को भी वापस लौटना पड़ा।

यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘‘अब हम ऐसे अनुभवी पर्वतारोहियों की मदद लेने पर विचार कर रहे हैं, जिनके पास पर्वतारोहण के लिए जरूरी उपकरण हों और जो घटनास्थल तक पहुंचकर सबूत जुटा सकें। जरूरी कौशल की कमी के कारण एएआईबी और यूकाडा की टीमों के लिए वहां तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जांच के लिए घटनास्थल तक पहुंचना बहुत जरूरी है, इसलिए अब दूसरे विकल्प तलाशे जाएंगे।’’

अधिकारियों ने बताया कि हेलीकॉप्टर जिस जगह दुर्घटनाग्रस्त हुआ, वहां एक खड़ी चट्टान है, जिसकी वजह से जांच दल के लिए वहां तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

यूकाडा के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि अब तक की जांच में सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर से पहले उसी मार्ग पर उड़ान भरने वाले अन्य पायलटों ने खराब मौसम की कोई सूचना नहीं दी थी और न ही उन्हें दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के पायलट की ओर से संकट का कोई संदेश (मे-डे सिग्नल) मिला था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बदरीनाथ से देहरादून जा रहे एक हेलीकॉप्टर के पायलट और दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के पायलट ने उस समय एक-दूसरे को देखा था, जब दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर देहरादून से बदरीनाथ जा रहा था तथा उस समय सब कुछ ठीक था।

अधिकारी ने कहा कि अभी तक इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि हेलीकॉप्टर किसी वस्तु या पक्षी से टकराया था।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले के वीडियो फर्जी हो सकते हैं या किसी अन्य तारीख के हो सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि जांचकर्ता सभी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं और हेलीकॉप्टर के अंदर लगे कैमरे की तलाश कर रहे हैं।

अधिकारी ने कहा कि 30 अक्टूबर को घाटी में ड्रोन उड़ाने के लिए किसी ने अनुमति नहीं मांगी थी। ऐसे में हेलीकॉप्टर के किसी ड्रोन से टकराने की संभावना कम है, लेकिन इस पहलू की भी जांच की जा रही है।

भाषा दीप्ति सिम्मी

सिम्मी