प्रयागराज, तीन नवंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कानपुर नगर के एक होटल में तोड़फोड़ और लूटपाट की कथित घटना के मामले में कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल को हलफनामे के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
अदालत ने प्रथम दृष्टया इस घटना में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की संलिप्तता पाए जाने के बाद पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
होटल नेगी ग्रैंड की मालकिन प्रीति बाजपेयी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने कहा कि अब इस जांच की निगरानी जिले के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी द्वारा किया जाना आवश्यक है।
अदालत ने आदेश की एक प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को भेजने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की।
जांच अधिकारी की ओर से दाखिल हलफनामे को असंतोषजनक पाए जाने और जांच में खामियां सामने आने के बाद अदालत ने यह आदेश पारित किया।
यह घटना पिछले वर्ष नवंबर की है, जब कुछ लोग जेसीबी मशीन लेकर होटल नेगी ग्रैंड पहुंचे और कथित तौर पर उसकी एक दीवार गिरा दी। इसके बाद होटल परिसर में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लेकिन पुलिस ने शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज नहीं की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद रावतपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कपिल देव सिंह नाम के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस घटना में प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे।
अदालत ने 16 अप्रैल 2026 की केस डायरी का भी उल्लेख किया, जिसमें लूटपाट की घटना में पुलिस अधिकारियों की कथित मिलीभगत दर्ज की गई थी। केस डायरी के अंश के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज और आम लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में एक जेसीबी मशीन को होटल नेगी ग्रैंड की दीवार गिराते हुए देखा जा सकता है। उस समय मौके पर कई लोग मौजूद थे।
केस डायरी में आगे दर्ज है कि होटल की खिड़कियों, दरवाजों, अलमारियों, टेलीविजन, सीसीटीवी कैमरों और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाया गया और परिसर से सामान लूट लिया गया। इसमें घटना के दौरान पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है।
अदालत ने 24 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा था कि इस मामले में पुलिस के उच्चतम स्तर के अधिकारियों का तत्काल ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता है। इसी के मद्देनजर पुलिस आयुक्त को अदालत में तलब किया गया है।
भाषा
सं, राजेंद्र रवि कांत