ढाका, तीन नवंबर (भाषा) बांग्लादेश सरकार ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना पर कपड़ा श्रमिकों के असंतोष को भड़काने का मंगलवार को आरोप लगाया। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कपड़ा श्रमिकों का हिंसक प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा, जिसके कारण सैकड़ों कारखानों को अपना कामकाज रोकना पड़ा और प्रशासन को अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी।
बांग्लादेश गारमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (बीजीएमईए) के मुताबिक, ताजा हिंसा के कारण 300 और कारखानों को बंद करना पड़ा। इसके साथ ही 31 अक्टूबर को विरोध-प्रदर्शनों का नया दौर शुरू होने के बाद से प्रभावित कारखानों की संख्या बढ़कर करीब 1,000 हो गई।
यह अशांति ढाका और उसके बाहरी औद्योगिक इलाकों, जिनमें गाजीपुर, आशुलिया, मीरपुर और नारायणगंज शामिल हैं, के अलावा मैमनसिंह जिले तक फैल गई है। श्रमिकों की पुलिस के साथ झड़पें हो रही हैं, सड़कें अवरुद्ध की जा रही हैं और उत्पादन कार्य बाधित हो रहा है।
प्रदर्शनकारी श्रमिक 30,000 टका (लगभग 23,000 भारतीय रुपये) न्यूनतम मासिक वेतन निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं, जो मौजूदा 12,500 टका (लगभग 9,507 भारतीय रुपये) से दोगुना से भी अधिक है। उनका कहना है कि भोजन, आवास, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने उनकी क्रय शक्ति को कम कर दिया है।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सूचना मामलों के सलाहकार जहेदुर रहमान ने अशांति के पीछे हसीना का हाथ होने का आरोप लगाया।
रहमान ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि जब तक हसीना जीवित हैं, वह सरकार को शांतिपूर्वक काम करने देंगी।
उन्होंने ढाका में एक प्रेस वार्ता में कहा, “मुझे नहीं लगता कि जब तक शेख हसीना जीवित हैं, वह सरकार को शांति से काम करने देंगी। जब तक हसीना जीवित रहेंगी, तब तक तोड़फोड़ की घटनाएं जारी रह सकती हैं।”
रहमान ने आरोप लगाया कि सत्ता से हटाई गई पूर्व प्रधानमंत्री ही इन विरोध-प्रदर्शनों की सूत्रधार हैं।
इससे पहले, गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने सोमवार को आरोप लगाया था कि हसीना की अवामी लीग पार्टी से जुड़े कुछ कपड़ा कारखाने के मालिक अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं।
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप