नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने उच्चतम न्यायालय द्वारा अरावली पर्वतमाला संबंधी उच्चाधिकार प्राप्त समिति के अनुरोध को अस्वीकार किए जाने पर सोमवार को निराशा जताई और कहा कि यह फैसला समझ से परे है।
समिति ने अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था।
पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘न्यायालय ने अपने विवेक से अरावली संबंधी उच्चाधिकार प्राप्त समिति के 31 अगस्त, 2026 के बाद अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का विस्तार देने के सबसे जायज अनुरोध को खारिज कर दिया है।’’
उन्होंने कहा कि समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 31 अगस्त, 2026 के बाद छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा था।
कांग्रेस नेता ने उच्चतम न्यायालय के इस फैसले को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण और समझ से परे’’ बताया।
उच्चतम न्यायालय ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और संरक्षण पर अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय देने से सोमवार को इनकार कर दिया।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने समिति को 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर समिति का पुनर्गठन किया जाएगा।
भाषा हक अविनाश
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