नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दिल्ली सरकार राजधानी में करीब 500 स्थानों पर लगाए गए राष्ट्रीय ध्वजों के व्यापक रखरखाव के लिए एक योजना लागू करेगी और इसके लिए एक एजेंसी नियुक्त करेगी। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
इससे पहले सरकार ने तेज हवाओं और प्रतिकूल मौसम के कारण बार-बार झंडे क्षतिग्रस्त होने के बाद अधिक टिकाऊ कपड़े की पहचान करने के लिए एक अध्ययन कराया था।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हम एक कंपनी को नियुक्त करने की योजना बना रहे हैं, जो झंडों के व्यापक रखरखाव का काम करेगी, हेल्पलाइन नंबर शुरू करेगी, झंडे फटने पर उन्हें बदलेगी और प्रतिदिन झंडों की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेगी। कंपनी की नियुक्ति के लिए निविदा जारी की गई है।’’
अधिकारी के अनुसार, शहर में करीब 500 स्थानों पर 115 फुट ऊंचे ध्वजदंड लगाए गए हैं। झंडों को बार-बार क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए उन्हें पॉलिएस्टर से बनाया गया है। हालांकि, ये तेज हवाओं का सामना नहीं कर पाते और मानसून के दौरान अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि नए झंडों के लिए मंगाए गए कपड़े में कुछ विशेष शर्तें पूरी होनी चाहिए, जिनमें आठ किलोग्राम से अधिक तन्यता मजबूती वाले धागे शामिल हैं।
अधिकारी ने कहा, ‘‘एजेंसी को कम से कम 10 मोबाइल पिकअप कवर्ड वैन तैनात करनी होंगी। प्रत्येक टीम में दो बिजलीकर्मी, दो सहायक और एक चालक होगा, ताकि औसतन प्रत्येक टीम 50 झंडों की देखरेख कर सके।’’
उन्होंने बताया कि चार साल के अनुबंध वाली इस रखरखाव परियोजना की अनुमानित लागत 33 करोड़ रुपये है।
सरकार की योजना के अनुसार, झंडों के क्षतिग्रस्त होने से संबंधित शिकायत दर्ज कराने के लिए एक हेल्पलाइन स्थापित की जाएगी। ध्वजदंडों के आसपास उचित रोशनी की भी व्यवस्था की जाएगी और निर्धारित समय के भीतर क्षतिग्रस्त झंडा नहीं बदलने पर ठेकेदार पर जुर्माना लगाया जाएगा।
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राखी नेत्रपाल
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