नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास स्थित सत्य निकेतन में इमारत ढहने के बाद मलबे में फंसे 19-वर्षीय आदित्य ने अपने परिवार को फोन कर खुद को बचाने की गुहार लगाई।
बिहार के रहने वाले बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य ने पांच मंजिला इमारत के ढहने के तुरंत बाद रविवार अपराह्न करीब दो बजे पटना में अपनी बहन को फोन किया। हालांकि उसे चार घंटे बाद मलबे से निकाल लिया गया, लेकिन उसके परिवार ने उसे बचाने में लगे वक्त को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
रविवार को ढही इस इमारत में सात लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। सत्य निकेतन स्थित पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास में केवल चार दिन पहले ही रहने आए युवक के लिए यह चार घंटे का इंतजार कष्टदायक था।
उसके पिता राजू कुमार के अनुसार, उसने अपनी बहन से कहा, 'मैं मलबे में फंसा हुआ हूं। मैंने किसी तरह अपने मोबाइल से फोन किया है और मेरे मोबाइल की बैटरी खत्म होने वाली है। कृपया मुझे बचा लो।'
आदित्य जीवित बच गया और फिलहाल एम्स में उसका इलाज चल रहा है, लेकिन उसका परिवार इस बात पर सवाल उठा रहा है कि मलबे के नीचे से उसके होश में होने और संवाद करने में सक्षम होने के बावजूद उसे बाहर निकालने में लगभग चार घंटे क्यों लग गए।
राजू ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘वह इस पीजी में बमुश्किल चार दिनों से रह रहा था। वह सबसे ऊपरी मंजिल पर रह रहा था और इसलिए इमारत ढहने के बाद वह मलबे में बहुत गहराई में नहीं दबा, जो मुझे लगता है कि मेरे बेटे के बचने का कारण है।’’
दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास यह इमारत रविवार अपराह्न करीब 1.30 बजे उस समय ढह गई जब इसमें मरम्मत का काम चल रहा था। दशकों पुरानी इस संरचना से 12 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए।
आदित्य करीब दो महीने पहले दिल्ली आया था और शुरुआती दिनों में लक्ष्मी नगर में रह रहा था।
पटना में एक डाकघर में काम करने वाले उसके पिता ने कहा कि आदित्य का फोन आने पर परिवार को शुरुआत में राहत मिली, लेकिन उसे बाहर निकाले जाने का इंतजार करते-करते यह राहत जल्द ही पीड़ा में बदल गई।
उसके पिता ने कहा कि होश में रहने और लगातार मदद के लिए चिल्लाने के बावजूद आदित्य को लगभग चार घंटे बाद बचाया जा सका।
राजू ने कहा, 'मुझे समझ नहीं आ रहा है कि उन्हें उसे बाहर निकालने में इतना समय क्यों लगा। वह सबसे ऊपरी मंजिल पर था और फोन करने के लिए पर्याप्त होश में था। गनीमत रही कि मेरे बेटे की जान नहीं गई, लेकिन उनलोगों का क्या जो उसके नीचे थे?'
बचाए जाने का इंतजार करते हुए आदित्य ने मलबे के अंदर से एक वीडियो भी बनाया, जिसमें उस खौफनाक स्थिति की झलक मिलती है, जिसमें वह और एक अन्य व्यक्ति फंसे हुए थे।
वीडियो में, कंक्रीट की सिल्लियों के नीचे एक संकीर्ण जगह में लेटे छात्र के धूल से सने चेहरे के एक तरफ खून लगा हुआ देखा जा सकता है। उसके कपड़े और चेहरा सीमेंट तथा धूल से ढके हुए हैं और उसका मोबाइल कैमरा उसके आसपास की दम घोंटने वाली जगह को दर्ज कर रहा है।
यह वीडियो कथित तौर पर आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज के एक छात्र ने एक सोशल मीडिया समूह में साझा किया था।
पुलिस ने इमारत के मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, जबकि मजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश दिए गए हैं। इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता को सोमवार को राजस्थान के भिवाड़ी इलाके से पकड़ा गया।
भाषा नोमान नोमान सुरेश
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