(श्रुति भारद्वाज)
नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना में जान गंवाने वाले 18 वर्षीय अक्षित की मां ने उसके शव की पहचान गले पर मौजूद एक तिल और पैर पर जन्मजात निशान से की।
पीजीडीएवी कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष का छात्र अक्षित पांच सितंबर को अपने गृह नगर से दिल्ली लौटा था। वह घटना से महज दो दिन पहले ही वापस आया था। उसकी मां श्वेता सिंह यादव ने कई दिन तक ऐसे पीजी की तलाश की थी, जहां उनके बेटे को पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए जरूरी सुविधाएं मिल सकें।
घटना के बाद सोमवार को वह एम्स पहुंचीं, जहां उन्होंने उसके शव की पहचान की।
श्वेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मैंने अपने बेटे के लिए पीजी चुनने से पहले इलाके में पांच-छह पीजी आवास देखे थे। मैं चाहती थी कि उसे एसी और वॉशिंग मशीन जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलें, ताकि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सके।”
घटना के बाद घटनास्थल पर पहुंचे अक्षित के दोस्तों के मन में उसके बचने की एक उम्मीद थी। कॉलेज प्रशासन ने उन्हें बताया था कि इमारत में रहने वाला एक छात्र लापता है।
अक्षित के दोस्त युगांक ने बताया कि कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को सूचना दी कि दुर्घटनाग्रस्त इमारत में रहने वाला एक छात्र गायब है, जिसके बाद वे तुरंत मौके पर पहुंचे।
युगांक ने कहा, “हम पहले घटनास्थल पर गए और फिर एम्स पहुंचे। हम बस यही प्रार्थना कर रहे थे कि वह लापता छात्र अक्षित न हो।”
शुरुआत में शव की पहचान नहीं हो पाई। लेकिन जब अक्षित की मां वहां पहुंचीं तो उन्होंने गले पर मौजूद तिल और पैर पर बने जन्मजात निशान से उसकी पहचान की।
युगांक ने कहा, “हमें उम्मीद थी कि अक्षित सुरक्षित होगा। बाद में हमें एक शव की पहचान करने के लिए कहा गया, लेकिन हम नहीं कर पाए। फिर उसकी मां ने गले के तिल और पैर के जन्मजात निशान से उसकी पहचान की। वह पल हमारे लिए बहुत दुखद था।”
इस घटना की खबर मध्य प्रदेश के कटनी स्थित अक्षित के गृहनगर में पहुंचते ही लोगों स्तब्ध रह गए। पड़ोसियों और दोस्तों ने उसे एक होनहार छात्र के रूप में याद किया।
कटनी में अक्षित के परिवार के पड़ोसी संदीप त्रिपाठी ने बताया कि परिवार को रविवार शाम करीब सात बजे इमारत ढहने की जानकारी मिली और वे तुरंत दिल्ली आने की तैयारी करने लगे।
उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “रविवार रात करीब सात बजे कॉलोनी के लोगों को अचानक खबर मिली कि जिस इमारत में अक्षित रहता था, वह ढह गई है। उसके पिता राजस्थान में थे, वह तुरंत दिल्ली पहुंचे। हमारे वार्ड पार्षद डब्बू रजक उसकी मां और बहन को रात में दिल्ली लेकर आए।”
परिवार सोमवार सुबह दिल्ली पहुंचा और अक्षित की तलाश शुरू की। उन्होंने उसके बारे में जानकारी जुटाई, लेकिन शुरुआत में कोई पुष्टि नहीं हो सकी।
त्रिपाठी ने कहा, “सुबह करीब नौ बजे वहां पहुंचने के बाद उन्होंने हर जगह तलाश की और जानकारी जुटाई, लेकिन कुछ पता नहीं चला। बाद में जब वे ट्रॉमा सेंटर गए तो अक्षित के शरीर के एक निशान से उसकी पहचान हो सकी।”
भाषा जोहेब माधव
माधव