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कोलकाता, सात सितंबर (भाषा) अदालत के फैसलों के बाद नौकरी गंवाने वाले 1,000 से अधिक शिक्षकों ने सोमवार को पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग के मुख्यालय ‘विकास भवन’ के बाहर धरना शुरू किया और राज्य सरकार से उनकी भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की।
प्रदर्शनकारी उन 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों में शामिल हैं, जिनकी नौकरियां 2016 की स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) परीक्षा में अनियमितताओं के संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2024 के फैसले के बाद रद्द कर दी गई थीं। इन्हीं परीक्षाओं के माध्यम से इनकी भर्ती हुई थी। उच्चतम न्यायालय ने 2025 में उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था।
बारिश के बीच ‘डिजर्विंग टीचर्स फोरम’ के सदस्यों ने तख्तियां लेकर कोलकाता से सटे साल्ट लेक के करुणामयी क्रॉसिंग से जुलूस निकाला, जो विकास भवन के बाहर धरने में तब्दील हो गया।
उच्चतम न्यायालय ने उन 2016 एसएससी अभ्यर्थियों की भर्ती परीक्षा आयोजित करने के लिए राज्य सरकार को 30 मई, 2027 तक की समयसीमा दी है, जिनकी नौकरियां रद्द कर दी गई थीं।
‘डिजर्विंग टीचर्स फोरम’ के सुब्रत बिस्वास ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन से इस मामले में मुलाकात करना चाहते हैं और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के हस्तक्षेप की मांग करते हैं।’’
प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी और विकास भवन के सामने सड़क पर बैठने के बीच बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
बिस्वास ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान बेरोजगार शिक्षकों के साथ एकजुटता व्यक्त करने वाली भाजपा हमारे साथ खड़ी होगी और पात्र शिक्षकों की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाएगी।’’
भाषा अमित सुरेश
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