(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने सोमवार को भारत के पारंपरिक ज्ञान और आज की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के बीच मजबूत संबंध बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आयुर्वेद, बीमारी से बचाव, स्वस्थ जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देकर एक स्वस्थ भविष्य बनाने में मदद कर सकता है।
यहां राष्ट्रीय मीडिया सेंटर में 11वें आयुर्वेद दिवस 2026 के सिलसिले में प्रेस वार्ता में जाधव ने कहा कि इस आयोजन को केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संचार अभियान का रूप लेना चाहिए।
इसके साथ ही आयुर्वेद दिवस तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत हुई।
आयुर्वेद दिवस का मुख्य कार्यक्रम 23 सितंबर को महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित किया जाएगा। इसका ध्येय वाक्य ‘बेहतर कल के लिए आयुर्वेद’ है जो भारत की समृद्ध आयुर्वेदिक विरासत को भविष्य की बदलती स्वास्थ्य-सेवा जरूरतों से जुड़ने के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
जाधव ने कहा कि दुनिया अब तेज़ी से बीमारी से बचाव वाली स्वास्थ्य सेवा, स्वस्थ जीवन शैली, पोषण, कल्याण और समग्र स्वास्थ्य की ओर देख रही है – ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें भारत की परंपरा और अनुभव बहुत समृद्ध है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दिवस न केवल भारत की विरासत का जश्न मनाने का मौका है, बल्कि इस विरासत को भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़ने का भी एक अवसर है।
जाधव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप एक ऐसी स्वास्थ्य पहल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जिसमें स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि स्वस्थ आदतें, सही खान-पान और दिनचर्या, मानसिक संतुलन और प्रकृति के साथ तालमेल भी शामिल हो।
जाधव ने इस साल के आयुर्वेद दिवस अभियान -- ‘बेहतर स्वास्थ्य नतीजों के लिए समग्र स्वास्थ्य देखभाल -- को दिशा देने वाले तीन मुख्य क्षेत्रों के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का मकसद बेहतर स्वास्थ्य नतीजों के लिए इलाज की अलग-अलग पद्धतियों की विशेषज्ञता और खूबियों का इस्तेमाल करना है।
मंत्री ने कहा कि ‘‘आयुर्वेद में प्रमाण, शोध और नवाचार’’ - यह दूसरा क्षेत्र है, जो आयुर्वेद की व्यापक वैश्विक स्वीकार्यता और भविष्य के विकास के लिए शोध, प्रमाण और नवाचार को ज़रूरी आधार मानता है।
उन्होंने कहा कि ‘‘सामुदायिक कल्याण और संपोषणीय जीवनशैली के लिए आयुर्वेद’’ - यह तीसरा क्षेत्र है, जो टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों के कल्याण में आयुर्वेद की भूमिका पर ज़ोर देता है।
भाषा
राजकुमार नरेश
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