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गुवाहाटी, सात सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को शोधार्थियों से ऐसे विषयों का चयन करने का आग्रह किया, जो समुदाय की समस्याओं का समाधान करें और समावेशी विकास को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ रोजगार हासिल करना नहीं, बल्कि आलोचनात्मक सोच और नवाचार को बढ़ावा देना होना चाहिए।
असम के अपने दो दिवसीय दौरे के अंतिम दिन गुवाहाटी विश्वविद्यालय में 110 करोड़ रुपये की लागत वाली बुनियादी ढांचा विकास परियोजना की आधारशिला रखने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी संस्थान की रैंकिंग महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन केवल रैंकिंग से उसकी पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
उन्होंने कहा, ‘‘शोधकर्ताओं को ऐसा शोध करना चाहिए जो समुदायों की समस्याओं का समाधान कर सके, मानवता की सेवा करे और नवाचार को समावेशी विकास का माध्यम बनाए।’’
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वह लोगों के जीवन में कितना बदलाव लाता है, कितना ज्ञान पैदा करता है और समाज के लिए कितना योगदान देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘विश्वविद्यालय केवल कक्षाएं नहीं हैं, बल्कि उत्कृष्टता, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के केंद्र हैं।’’
राधाकृष्णन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि देशभर के विश्वविद्यालयों में स्वर्ण पदक विजेताओं में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह नारी शक्ति के लिए एक स्वागत योग्य विकास है। एक मूक क्रांति हुई है और यह ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में काफी मददगार साबित होगी।’’
गुवाहाटी विश्वविद्यालय को पूर्वोत्तर का सबसे पुराना विश्वविद्यालय बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह न केवल इस क्षेत्र का बल्कि पूरे देश का एक प्रमुख शिक्षण संस्थान बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह दृढ़ता और जन-आकांक्षा का प्रमाण है तथा तेजी से हो रहे प्रौद्योगिकी विकास के इस दौर में विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।’’
उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुवाहाटी विश्वविद्यालय ने शोधकर्ताओं, विद्वानों, प्रतिष्ठित व्यक्तियों, कलाकारों और शिक्षाविदों समेत कई ऐसी हस्तियों को तैयार किया है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन को समृद्ध किया है।
राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं है। इसे आलोचनात्मक सोच और नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए। विद्वानों को ऐसे विषयों पर शोध करना चाहिए, जो समुदाय की समस्याओं का समाधान करें और समावेशी विकास को बढ़ावा दें।’’
उन्होंने कहा कि गुवाहाटी विश्वविद्यालय का कृष्णकांत हांडिक पुस्तकालय ज्ञान का भंडार है, जिसमें करीब तीन लाख पुस्तकें, हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां, डिजिटल अभिलेख और महत्वपूर्ण विशेष संग्रह मौजूद हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मुझे यह जानकर भी बहुत आश्चर्य हुआ कि विश्वविद्यालय में तमिल पढ़ाई जाती है और तमिल साहित्य की कई महान कृतियों का असमिया भाषा में तथा असमिया साहित्य की कृतियों का तमिल में अनुवाद किया जा रहा है। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि हमारी संस्कृतियां कितनी करीब हैं। मैं तमिलनाडु के विश्वविद्यालयों से असमिया साहित्य को बढ़ावा देने का आग्रह करूंगा।’’
उन्होंने छात्रों से अपने लक्ष्य निर्धारित करने और अपनी गति से उन्हें हासिल करने के लिए प्रयास करने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों से नशीले पदार्थों से दूर रहने की भी अपील की। इस अवसर पर नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ शपथ भी दिलाई गई।
बुनियादी ढांचा विकास परियोजना के बारे में राधाकृष्णन ने कहा कि इससे विश्वविद्यालय के बौद्धिक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलेगा।
आधारशिला रखने के कार्यक्रम में असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, शिक्षा मंत्री रानोज पेगू, विश्वविद्यालय के कुलपति नानी गोपाल महंत और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इस परियोजना के प्रमुख घटकों में शैक्षणिक भवन, एक छात्रावास, आधुनिक मेस भवन, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए छात्रावास, कृष्णकांत हांडिक पुस्तकालय-सह-सम्मेलन कक्ष का नवीनीकरण, बिरिंची बरुआ सभागार का उन्नयन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए आवासीय क्वार्टर का निर्माण शामिल है।
इस अवसर पर राधाकृष्णन ने दो पुस्तकों का भी विमोचन किया। इनमें ‘डॉ. भूपेन हजारिका : 100 इयर्स ऑफ ए वांडरिंग सॉन्ग’ और विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘चंद्रकांता अभिदान’ का पांचवां संस्करण शामिल है।
भाषा आशीष नेत्रपाल
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