भोपाल, सात सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश कैडर की वर्ष 2011 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की एक महिला अधिकारी ने एक साल में चौथी बार तबादला किए जाने पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि साजिश रचने वाले हमेशा उनसे जीत जाते हैं जबकि वह हार जाती हैं।
मध्यप्रदेश सरकार ने पांच सितंबर को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया था। इसमें आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजना विभाग की संचालक, मध्यप्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद (मेपसेट) की प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम की प्रबंध संचालक और आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान में संचालक पद की जिम्मेदारी संभाल रहीं नेहा मारव्या का भी नाम शामिल था।
फेरबदल में उन्हें अन्य पदों से हटाकर केवल अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इससे आहत मारव्या ने मध्यप्रदेश आईएएस अधिकारी एसोसिएशन के एक व्हाट्सएप ग्रुप में अपना दर्द बयां करते हुए हुए लिखा, ‘‘पांच सितंबर 2026 की तबादला सूची देखकर मैं बेहद परेशान हूं, जिसमें एक बार फिर मेरा नाम शामिल है। पदभार संभालने के महज 50 दिनों के भीतर मेरा तबादला कर दिया गया। एक साल के भीतर यह चौथी बार है, जब मेरा नाम तबादला सूची में आया है।’’
उन्होंने अपना असंतोष दर्ज कराते हुए और समाधान मिलने की उम्मीद की तथा साथ ही लिखा कि यह व्हाट्सएप ग्रुप केवल जन्मदिन की शुभकामनाएं और बधाई देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
इस व्हाट्सअप ग्रुप में कार्यरत आईएएस अधिकारियों के साथ कई सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं।
एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में पुष्टि की कि मारव्या ने व्हाट्सअप ग्रुप में पोस्ट डालकर अपने तबादले के संबंध में आपत्ति जताई है।
उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि तबादला और पोस्टिंग सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और आईएएस एसोसिएशन का इसमें कोई दखल नहीं है।
आईएएस अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में की गई मारव्या की यह पोस्ट अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही है।
इस संबंध में ‘पीटीआई-भाषा’ ने जब मारव्या से संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने ना ही फोन उठाया और ना ही भेजे गए एसएमएस का कोई जवाब दिया।
मारव्या ने ग्रुप में अंग्रेजी में किए पोस्ट में कहा कि उन्होंने हमेशा तबादले के आदेशों को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया है लेकिन इस बार वह खुद को बेहद हतोत्साहित महसूस कर रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा तबादला इसलिए किया गया क्योंकि विभाग के अधीन काम करने वाले उन कर्मचारियों ने मेरे खिलाफ बगावत कर दी, जिनका नियंत्रण मेरे पास नहीं बल्कि विभाग के पास है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी उनकी मेज पर हाथ पटक रहे थे और तबादला करवाने की धमकी दे रहे थे।
महिला आईएएस अधिकारी ने कहा, ‘‘मैंने उचित माध्यम से कर्मचारियों की इस अवज्ञा, फाइलों को रोककर रखने और विभाग में मेरे साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। मुझे उम्मीद थी कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके बजाय मेरा ही तबादला कर दिया गया।’’
मारव्या ने सवाल उठाया कि क्या एक आईएएस अधिकारी इतना असुरक्षित है कि उसके अधीनस्थ कर्मचारी भी उसके खिलाफ बगावत करके उसका तबादला करवा सकते हैं?
उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई भी आईएएस अधिकारी ऐसा कुछ कर सकता है जिसके कारण पदभार संभालने के महज एक महीने में अधीनस्थ कर्मचारी उसके खिलाफ बगावत पर उतर आएं क्योंकि एक अधिकारी को तो एक महीने में कामकाज समझने का पर्याप्त अवसर भी मुश्किल से मिल पाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अधीनस्थ कर्मचारियों की इस बगावत के दबाव में मेरा तबादला करके मुझे अपमानित किया गया है।’’
मारव्या ने कहा कि उनकी तैनाती की अवधि केवल 2-3 महीने की होती है और जब तक वह अपने पद और जिम्मेदारियों को समझ पाती हैं, तब तक उन्हें हटा दिया जाता है।
उन्होंने आगे लिखा, ‘‘इस उम्मीद में कि हालात सुधरेंगे, मैंने वर्षों तक हाशिए पर रखे जाने और काम न दिए जाने के बावजूद चुप्पी और धैर्य बनाए रखा लेकिन अब स्थिति और खराब हो गई है। अब तो अधीनस्थ कर्मचारी मुझे धमकी देने लगे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमेशा साजिश रचने वाले जीत जाते हैं और मैं हार जाती हूं। व्यवस्था ने मुझे विफल कर दिया है। आज निशाना मैं हूं, कल कोई दूसरा आईएएस अधिकारी हो सकता है।’’
एक अन्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ने बताया कि मारव्या के पोस्ट के बाद कुछ अधिकारियों ने उन्हें तबादले के लिए हमेशा तैयार रहने और परिस्थितियों का सामना करने का सुझाव दिया जबकि कुछ ने उन्हें अपने तबादले संबंधी अनुभव साझा कर सांत्वना दी।
अधिकारी ने बताया कि बाद में मध्यप्रदेश आईएएस अधिकारी एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव के हस्तक्षेप के बाद ग्रुप में सदस्यों की प्रतिक्रिया का दौर थमा।
इस बारे में श्रीवास्तव से भी संपर्क साधने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया।
भाषा
ब्रजेन्द्र रवि कांत